पैसों की हवस और करियर की अंधी दौड़ ने इंसान को कितना खाली कर दिया है—इसकी रूह कंपा देने वाली मिसाल अमेरिका से सामने आई है।
90 लाख रुपये सालाना पैकेज पर काम करने वाला एक युवक “सफलता” के शिखर तक तो पहुँच गया,
लेकिन इंसानियत की ज़मीन से इतना कट गया कि उसे अपने ही माँ-बाप की मौत की खबर तक नहीं लगी।
करीब एक महीने तक बुज़ुर्ग माता-पिता घर में मृत पड़े रहे…
और डॉलर कमाने वाला बेटा एक फोन कॉल तक नहीं कर पाया।
👮♂️ पुलिस और पड़ोसियों के मुताबिक—
👉 पिता की मौत लगभग 30 दिन पहले
👉 माँ की मौत करीब 20 दिन पहले हो चुकी थी
जब बदबू फैलने लगी, तब जाकर इस भयावह सच्चाई से पर्दा उठा।
यह सिर्फ एक पारिवारिक त्रासदी नहीं है—
यह हमारे आधुनिक समाज की moral bankruptcy का आईना है।
जिस बेटे को माँ-बाप ने पाल-पोसकर इस काबिल बनाया कि वह सात समंदर पार जाए,
उसी ने हफ्तों तक उनकी आवाज़ सुनने की कोशिश भी नहीं की।
❓क्या यही है सफलता?
जहाँ बैंक बैलेंस बढ़ता जाए, लेकिन दिल खाली होता जाए?
जहाँ पैकेज, प्रमोशन और ग्लोबल एक्सपोज़र तो हो,
लेकिन अपने घर की खबर तक न हो?
💸 वह 90 लाख का पैकेज भी बेकार है,
अगर वह इंसानियत के आगे कौड़ियों से भी सस्ता लगने लगे।
⚠️ यह घटना हर उस इंसान के लिए eye-opener है
जो करियर के नाम पर अपने संस्कारों और बूढ़े माँ-बाप को पीछे छोड़ देता है।
सफल होना गलत नहीं है—
लेकिन अगर सफलता की ऊँचाई से आपको अपने घर की हालत न दिखे,
तो समझ लीजिए…
वह ऊँचाई नहीं, एक गहरी खाई है।
🙏 याद रखिए—
रिश्तों की गरमाहट के बिना करोड़ों की कमाई भी रद्दी काग़ज़ से ज़्यादा कुछ नहीं।