क्या कोई इंसान 700 साल से ज़्यादा जी सकता है? 🤯
इतिहास और आध्यात्म की दुनिया में एक ऐसी रहस्यमयी कहानी मिलती है।
जो सोचने पर मजबूर कर देती है।
यह कहानी है शिव प्रभाकर सिद्ध योगी की—एक ऐसे योगी, जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने मौत को भी मात दी।
समय से आगे जीने का रहस्य ⏳
कहानी के अनुसार, उनका जन्म 16 मार्च 1263 को केरल के एक सम्मानित नंबूदरी ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
और कहा जाता है कि उन्होंने 6 अप्रैल 1986 को अपने अंतिम शरीर को छोड़ा।
यानी कुल मिलाकर लगभग 723 साल का जीवन।
यह कैसे संभव हुआ?
मान्यता है कि उन्हें परकाया प्रवेश नाम की दुर्लभ योग विद्या में पूर्ण सिद्धि प्राप्त थी—जिससे वे अपनी चेतना को एक शरीर से दूसरे शरीर में स्थानांतरित कर सकते थे।
ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने अपने जीवन में 17 अलग-अलग शरीर बदले।
हिमालय में तपस्या की अनोखी कहानी 🏔️
जब वे सिर्फ 9 साल के थे।
तब एक रहस्यमयी साधु उनके जीवन में आए।
कई लोग मानते हैं कि वह स्वयं भगवान शिव थे।
वही उन्हें हिमालय की एक गुफा में ले गए, जहाँ उन्होंने लगातार 43 वर्षों तक कठिन तपस्या और ध्यान किया।
इस लंबे साधना काल के बाद वे एक ऐसे योगी बने।
जिन्हें प्रकृति के नियमों पर भी गहरी समझ और नियंत्रण प्राप्त हो गया।
ऐसी शक्तियाँ, जो दिमाग घुमा दें ✨
उनके जीवन से जुड़ी कथाओं में कई अचंभित कर देने वाली घटनाओं का ज़िक्र मिलता है।
भक्तों के अनुसार, वे—
• साधारण धातु को सोने में बदल देते थे
• खौलते पानी में बिना किसी चोट के स्नान कर लेते थे
• लोगों के मन की बात जान लेते थे
• भारी से भारी वस्तु को बिना छुए हिला देते थे
उनके लिए ये चमत्कार नहीं, बल्कि चेतना की शक्ति के उदाहरण थे।
गुरुओं के भी गुरु 🙏
कहा जाता है कि वे कई महान संतों के मार्गदर्शक रहे।
सामाजिक सुधारक श्री नारायण गुरु को भी उनका आशीर्वाद मिला था।
उनकी शिक्षा बहुत सरल थी—
👉 पूरी मानवता एक ही परिवार है, और इस सत्य को जानने का रास्ता हमारे अंदर ही है।
एक सवाल जो हमें सोचने पर मजबूर करता है…
शिव प्रभाकर सिद्ध योगी की कहानी हमें यह पूछने पर मजबूर करती है—
क्या हमने अपनी चेतना की असली ताकत को भुला दिया है?

