आप है संतोष कुमार साह जी।
और साथ में है इनकी धर्मपत्नी वंदना कुमारी जी। संतोष जी वर्तमान में सासाराम कोर्ट में जज (ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट) है।
इनके दाम्पत्य जीवन में कुछ ऐसी चीजें घटित हुई रहेगी जिसके कारण तलाक की नौबत आ गई।
इनके प्रोफेशन के हिसाब से इसमें तो ज्यादा दिक्कत नहीं आनी थी लेकिन फिर भी ऐसी भयंकर दिक्कतें आई होगी और जज साहब पे इतना दबाव आया होगा कि ऑफ द कोर्ट कुछ बड़ा करने की सोच लिए।
मल्लब एक जज हो के भी तलाक के वक्त एक पत्नी कितना कुछ प्रताड़ित कर सकती है।
उसका अनुमान आप लगा लीजिये।
एक आम दंपति को तलाक के वक्त एक जज बहुत कुछ समझाने का प्रयास करता है, समय देता है काउंसिलिंग के लिए कि कुछ समय और ले लो और फिर निर्णय लो।
फाइनल सेटलमेंट में पत्नी द्वारा किये गए माँगों को एक जज बहुत सामान्य तरीके से लेता होगा लेकिन एक पति के ऊपर क्या कुछ गुजरता होगा वो उतने तह में नहीं जा पाते।
अभी जब जज साहब के खुद के तलाक की नौबत आई तो इन्होंने ऑफ द कोर्ट ही मामला सलटने का सोच लिया।
क्योंकि सेटलमेंट और मेंटेनेंस के लिए बहुत भारी विवाद चल रहा था इनके दोनों के बीच।
तो इसलिए जज साहब ने ‘न रहेगी बाँस और न बजेगी बाँसुरी’ वाली थ्योरी को अंजाम देने की सोची।
जज साहब ने अपनी ही पत्नी की सुपारी दे डाली।
दो लाख रुपये में सौदा तय हुआ।
गोड्डा जिले के पत्थरगामा थाना क्षेत्र में तीन सुपारी किलरों ने वंदना कुमारी के ऊपर फायरिंग की।
जिसमें वंदना गंभीर रूप से घायल हुई और अभी अस्पताल में उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।
अस्पताल में ही ये अपना बयान दी जिसके आधार पे एफआईआर हुई।
और जब जांच आगे बढ़ी तो सभी सुपारी किलर गिरफ्त में आ गए और सबने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
जज साहब के इस कृत्य में इनके दो भाई भी शामिल है।
समाचार समाप्त।
अब आप सब इसके बहुआयामी विश्लेषण को स्वतंत्र है।

