*पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के अवैध प्रबंध निदेशक कार्यालय पर 1.34 करोड़ पेनाल्टी, फायर एनओसी गायब — सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद क्या गिराया जाएगा?*
लखनऊ – दिल्ली के मालवीय नगर में 21 लोगों की जान लेने वाले भीषण अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे प्रदेश में हाई-राइज बिल्डिंग्स, होटलों और दफ्तरों की सघन जांच के सख्त निर्देश दिए हैं। लेकिन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक कार्यालय पर वाराणसी विकास प्राधिकरण ने 1.34 करोड़ रुपये की पेनाल्टी लगा दी है।
साक्ष्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के अवैध प्रबंध निदेशक कार्यालय भवन का मानचित्र स्वीकृत नहीं होने पर 1.33 करोड़ रुपये की पेनाल्टी लगाई गई। ब्याज सहित यह राशि 1.34 करोड़ के करीब पहुंच गई है। पूर्वांचल डिस्कॉम प्रबंधन ने अभी तक यह पेनाल्टी जमा नहीं की है।
महत्वपूर्ण बात यह है इस पूरे मामले की जांच स्टेट विजिलेंस कछुए की रफ्तार से कर रही है।
*जब प्रबंध निदेशक कार्यालय का नक्शा ही पास नहीं है, तो फायर एनओसी कैसे मिल जाएगी?* *लेकिन फिर भी अन्नापत्ति प्रमाण पत्र की मांग पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के अधिकारियों के द्वारा की जा रही है जिस पर मुख्य अग्निशमन अधिकारी, वाराणसी के आधिकारिक जवाब (RTI) में स्पष्ट रूप से लिखा है*
*“प्रस्तुत भवन अग्निशमन विभाग द्वारा अग्नि अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है।”*
यानी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के अवैध प्रबंध निदेशक कार्यालय में फायर एनओसी नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश (30 अप्रैल 2025)
माननीय सर्वोच्च न्यायालय (न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन) ने 30 अप्रैल 2025 को दिए गए महत्वपूर्ण आदेश में अवैध निर्माणों के संबंध में बहुत सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है:
अनधिकृत निर्माण को ध्वस्त किया जाना चाहिए। इसमें कोई रास्ता नहीं है।
अदालतों को कोई उदारता या दया नहीं दिखानी चाहिए। अनधिकृत निर्माण करने वाले व्यक्ति के प्रति कोई सहानुभूति नहीं दिखाई जाएगी।
अवैध निर्माण को नियमित करने की कोई गुंजाइश नहीं है। अदालतें वैधानिक बंधनों से मुक्त नहीं हैं।
अवैध निर्माण के मामलों में सख्त रुख अपनाया जाना चाहिए।
अगर कोई अधिकारी या प्राधिकरण इन निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ अवमानना कार्यवाही और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
*कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकारों को सभी संबंधित विभागों को सर्कुलर जारी करना* *चाहिए कि इन निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए।*
*यहाँ मामला और भी गंभीर*
*पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के अवैध प्रबंध निदेशक कार्यालय की बिल्डिंग पहले बन चुकी थी*, *उसके बाद नक्शा पास कराने के लिए आवेदन किया गया। यानी शुरुआत से ही बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण कार्य किया गया।*
*अगर सर्वोच्च न्यायालय या अदालत के आदेश पर इस अवैध इमारत को गिराया गया, तो गिराने का पूरा खर्चा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम को ही वहन करना पड़ेगा।*
*इलाहाबाद हाईकोर्ट का भी सख्त रुख भी हाल ही में कहा है कि भ्रष्टाचार और अनियमितता के मामलों में वरिष्ठ अधिकारी भी जवाबदेही से नहीं बच सकते।*
*विधान परिषद में गलत जवाब उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य आशुतोष सिन्हा ने इस मामले को दो बार विधान परिषद में उठाया था दूसरी बार पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम ने लिखित जवाब दिया था कि “हमें नक्शा बनवाने की कोई जरूरत नहीं है”। यह जवाब तथ्यों से परे और गलत था परंतु इस पर कोई भी कार्रवाई पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के अधिकारियों के द्वारा नहीं की गई*।
*अब ऐसे में सवाल यह उठता है क्या माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुप्रीम कोर्ट के 30 अप्रैल 2025 के आदेश के अनुरूप पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के अवैध प्रबंध निदेशक कार्यालय को गिराने का आदेश देंगे?*
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के अवैध प्रबंध निदेशक कार्यालय में रोज़ सैकड़ों लोग आते हैं। अगर आग लगी तो सबकी जान को खतरा है।
*समय के उपभोक्ता की लगातार पैरवी के कारण ही यह मामला उजागर हो पा रहा है*।
*पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के अवैध प्रबंध निदेशक कार्यालय पर लगी 1.34 करोड़ पेनाल्टी की वसूली अनिरुद्ध चौरसिया से व्यक्तिगत रूप से की जाए यहां पर भी विशेष वर्ग वाला आरक्षण प्राप्त होगा क्या विभागीय संगठन इसको विशेष वर्ग के ऊपर अत्याचार या अन्य बातें कहते हुए इसको दूसरा ही रूप देंगे या फिर यह भी आर पी केन पूर्व मुख्य अभियंता जैसे मामले की तरह दबा दिया जाएगा और अनिरुद्ध चौरसिया रिटायर होकर अपने घर चले जाएंगे*?
*क्या पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के अवैध प्रबंध निदेशक कार्यालय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप गिराया जाएगा? इस पर स्पष्ट निर्णय लिया जाए।*
*अगर इमारत गिराई गई तो गिराने का पूरा खर्चा भी जिम्मेदार अधिकारियों से वसूला जाए?*
*मुख्यमंत्री के फायर सेफ्टी निरीक्षण के आदेश प्रबंध निदेशक कार्यालय पर भी सख्ती से लागू किए जाएं?*
*स्टेट विजिलेंस द्वारा चल रही जांच को तेज किया जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए?*
*क्या भ्रष्टाचार में शामिल अन्य उच्च अधिकारियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा और जांच में दोषी पाए गए अधिकारियों व कर्मचारीयों के तुरंत नौकरी से बर्खास्त किया जाए या फिर निलंबित कर जांच बैठाई जाएगी या फिर उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करा कर उनको नौकरी पूरी करने दी जाएगी ?*
*अब पाठक खुद निर्णय ले कि जब नियमों का उल्लंघन विभाग के शीर्ष कार्यालय में ही हो रहा हो और विधान परिषद में भी गलत जवाब दिया गया हो सरकार को ही धोखा दिया जा रहा हो, तब आम नागरिकों से नियमों का पालन कराने की अपेक्षा करना कितना उचित है? प्रधानमंत्री के क्षेत्र में हुए इस अवैध निर्माण में किसी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है वाराणसी विकास प्राधिकरण क्या दुर्घटना होने पर ही सचेत होगा विकास प्राधिकरण?*
*युद्ध अभी शेष है*
*अविजित आनन्द, संपादक*
*चन्द्रशेखर सिंह, प्रबंध संपादक*
*अमूल्यरत्न न्यूज– राष्ट्रीय हिंदी मासिक समाचार पत्र, लखनऊ*

