विश्व हिन्दी दिवस पर डॉ. विद्यासागर ‘साहित्य शिरोमणि’ से सम्मानित
जनपद की माटी के लाल और प्रख्यात विद्वान डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने प्रदेश स्तर पर जनपद का गौरव बढ़ाया है।
विश्व हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर प्रयागराज के एलनगंज स्थित राज्य शिक्षा संस्थान में आयोजित भव्य सारस्वत समारोह में उन्हें प्रतिष्ठित ‘साहित्य शिरोमणि सम्मान-2026’ से नवाजा गया।
समारोह के मुख्य अतिथि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति श्री सिद्धार्थ नन्दन ने डॉ. उपाध्याय को यह सम्मान प्रदान किया। इस दौरान उच्च न्यायालय की वरिष्ठ निबंधक श्रीमती क्षमा श्रीवास्तव, राज्य हिंदी संस्थान की संपादिका डॉ. अमिता दूबे, रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल रजनेश कुमार और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के निदेशक प्रो. सुधीर कुमार शुक्ला विशेष रूप से उपस्थित रहे।
डॉ. उपाध्याय को यह सम्मान प्रकाण्ड विद्वान प्रो. डॉ. अखिलेश त्रिपाठी एवं महामना मदन मोहन मालवीय की प्रपौत्री डॉ. विमला व्यास जैसी महान विभूतियों के साथ साझा रूप से प्राप्त हुआ।
सम्मान समारोह के प्रथम उद्घाटन सत्र में डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने मुख्य वक्ता के रूप में अपनी बात रखी।
उन्होंने ‘हिन्दी भाषियों के विरुद्ध भाषाई राजनीति: कारण और समाधान’ विषय पर व्याख्यान देते हुए हिंदी की वर्तमान चुनौतियों और उनके ठोस समाधानों पर प्रकाश डाला।
उनके सारगर्भित संबोधन को उपस्थित विद्वानों ने काफी सराहा। उक्त सम्मेलन में देश के विभिन्न विद्वानों के लेखों के संग्रह ‘मुखरित गागरी, हमारी देवनागरी’ का विमोचन हुआ, जिसमें डॉ. उपाध्याय का शोधपरक आलेख ‘देवनागरी का डिजिटल अवतार: परम्परा से प्रगति तक’ प्रमुखता से प्रकाशित हुआ है।
इसमें उन्होंने देवनागरी के तकनीकी पक्ष और डिजिटल माध्यमों पर इसके प्रभावी प्रयोग को बखूबी दर्शाया है।
डॉ. उपाध्याय की इस बड़ी उपलब्धि पर जनपद के साहित्यिक जगत में खुशी की लहर है।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जनार्दन राय, शिवजी पाण्डेय ‘रसराज’, डॉ. मदन राम, नन्द जी नन्दा, डॉ. जितेन्द्र स्वाध्यायी राजेश सिंह ‘श्रेयस’, डॉ. अशोक सिंह और राधेश्याम यादव आदि ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है।
साहित्यकारों ने कहा कि डॉ. उपाध्याय का यह सम्मान बलिया की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का सम्मान है।

