एक पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बाराबंकी निकल रहा था! तभी लम्बे समय से हमारे घर में काम करने वाला नरेन्द्र चाय लेकर आया! चाय देने के बाद जब वह थोड़ी देर तक खड़ा रहा तो मैंने पूछा- “कोई बात है नरेन्द्र?”
उसके चेहरे की भाव-भंगिमा और माथे की शिकन
बता रही थी कि भीतर ही भीतर किसी बात को कहने की हिम्मत जुटा रहा था! मैंने तुरन्त उसकी मनःस्थिति को भांप लिया और थोड़ा सहज अन्दाज में फिर से पूछा!
उसने सकुचाते हुए कहा कि सर, आप आज जिस जगह कार्यक्रम में जा रहे हैं वहां से 10-15 किलोमीटर की दूरी पर मेरा गांव है! अगर आप थोड़ा समय निकालकर मेरे घर चलते तो बड़ी कृपा होती! मैंने कहा इसमें इतना डरने और संकोच करने की क्या ही बात है! मैं अवश्य चलूँगा और तुम भी मेरे साथ चलो! इसके बाद तो जैसे उसकी ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहा!
नरेन्द्र लम्बे समय से हमारे घर की देख-रेख जवाबदेही और जिम्मेदारी से करता आया है! उसके समर्पण, निष्ठा और ईमानदारी जैसे गुणों ने सदैव सराहना अर्जित की है! अपने लगनशील और निष्ठावान सहयोगियों के घर जाकर उनके परिजनों से मिलने के क्रम को मैंने सार्वजनिक जीवन के पहले से ही अपनाया है! मेरी सुरक्षा में तैनात जवान, कार्यालयी स्टाफ और घरेलू स्टाफ सभी के यहाँ अलग-अलग अवसरों पर जा चुका हूँ!
पहले कार्यक्रम से निकलकर नरेन्द्र के परिजनों से मिलने उसके घर गया! पूरे गांव और विशेषकर उसके परिजनों ने बड़ा आदर-सत्कार किया! सभी ने कहा कि आपका आगमन पूरे गांव के लिए गौरव की बात है! परिजनों ने कहा कि यह हमारे परिवार के साथ ही पूरे गांव के लिए एक अभूतपूर्व घटना है जो अब दूसरों को सुनाई जाने वाली कहानी बन जायेगी।

