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कहानी फर्श से अर्श और अर्श से फर्श तक पहुंचने की,
इंसान को ना कभी छोटा सोचना चाहिए ना थोड़े में संतोष करना चाहिए,
कम से कम यह कहानी तो यही बताती है,
आप हैं श्री सनी कुमार जी,
पढ़ने में ऐसे ही थे सो पिताजी ने जुगाड़ से यूनिवर्सिटी में चतुर्थ श्रेणी में करा दिया,
पर जिनके सपने बड़े हों ना उनको चतुर्थ श्रेणी की नौकरी नहीं पूरा कर पाती है,
सो कुछ ही दिन में सनी कुमार जी समझ गए कि यूनिवर्सिटी में अगर कायदे की कोई पोस्ट है तो वो केवल एक ही है,
बाकी तो सब ऐसे ही है सो सनी कुमार जी चल दिए तैयारी करने,
घर परिवार भूल तैयारी में जुट गए हालांकि इस बीच घर वालों ने एक अच्छी सी लड़की देखकर उनकी शादी भी करा दी थी और एक बच्चा भी हो गया था पर सनी कुमार ने हार नहीं मानी और कुछ दिन बाद लोगों को पता चला कि सनी कुमार आईपीएस हो गए हैं,
कहते हैं की सफलता बड़े-बड़े के दिमाग खराब कर देती है, उनके केस में भी वही हुआ,
सनी कुमार जी की आंख एक युवती से लड़ गई और वह उसके साथ वह लिव इन में रहने लगे,
इस बात का पता जब उनकी पत्नी को चला तो वह अपने बच्चे को लेकर मायके चली गई, और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया,
बीवी के मायके जाने का तो सनी कुमार जी पर कुछ फर्क नहीं था पर वो अपने बच्चे को बड़ा प्रेम करते थे सो मारे गुस्से में उन्होंने अपनी साली के बच्चे का ही अपहरण कर लिया और बदले में अपना मुकदमा हटवाया,
साली ने इनके उपर मुकदमा दर्ज कराने की कोशिश की पर एक आईपीएस के खिलाफ किस थाने में मुकदमा दर्ज होता तो सनी कुमार बिंदास घूमते रहे,
इतना ही नहीं सनी कुमार पर धुआंधार पैसे खाने की भी आरोप लगने लगे,
वो किसी भी व्यापारी के पास पहुंचने उसे अर्दब में लेते कि मुकदमा दर्ज करा के एनकाउंटर कर दूंगा, बिचारा डर के मारे दो चार लाख पकड़ा देता,
इस तरह सनी कुमार जी का जीवन मस्त चल रहा था कि एक व्यापारी ने घाघपंती की और अपने संपर्कों के माध्यम से इनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई करने की कोशिश करने लगा,
पुलिस वालों ने जब इनकी फोटो देखी और बाकी चीजों का मिलान किया तो पता लगा कि इस नाम और शक्ल का आईपीएस तो पूरे बृह्मांड में कहीं नहीं है,
तब पता चला कि सनी कुमार जी दरअसल फर्जी आईपीएस हैं, फिर क्या था सनी कुमार जी टांग लिए गए,
अब उनके पुराने मामले भी खोजे जा रहे हैं,
अब वह कायदे से रेले जाएंगे,
मोरल ऑफ़ द स्टोरी
यदि आप असली वाले आईपीएस नहीं है तो पैसा खाने/ लिव इन में रहने आदि की भूल बिल्कुल ना करें,
यह सब सर्वाधिकार केवल असली आईपीएस को ही प्राप्त हैं, किसी और को नहीं।

