सच का साथ देने वाले स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी थे पंडित गोविन्द बल्लभ पंत : यशवीर कृष्ण त्रिपाठी
महराजगंज ,घुघली क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय बिरैचा में शुक्रवार को भारत रत्न पंडित गोविन्द बल्लभ पंत की जयंती धूमधाम से मनाई गई । इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक यशवीर कृष्ण त्रिपाठी ने कहा कि पंडित गोविन्द बल्लभ पंत
सच का साथ देने वाले स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी थे। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद काशीपुर में वकालत करने लगे। वह एक अच्छे वकील थे। उनके बारे में एक बात कही जाती थी कि पंत जी एक ऐसे वकील हैं जो सिर्फ सच का साथ देते हैं और सच्चे केस ही लड़ते हैं। यह सच का ही जोश था कि पंत ने अंग्रेज़ों के बनाए कई कानूनों को चुनौती दी और उन्हें खत्म करने में अहम योगदान दिया।
इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षक डॉ धनञ्जय मणि त्रिपाठी ने कहा कि पंडित गोविन्द बल्लभ पंत को कई बार जेल भी जाना पड़ा। महात्मा गांधी के ‘नमक सत्याग्रह’ की तर्ज पर उन्होंने भी ऐसा ही एक आंदोलन शुरू किया था, जिसके लिए उन्हें जेल भेज दिया गया। इतना ही नहीं, उन्होंने साइमन कमिशन के बहिष्कार में भी हिस्सा लिया था। नमक सत्याग्रह के अलावा बल्लभ पंत को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भी जेल में रहना पड़ा। मार्च 1945 तक वह कांग्रेस कमेटी के अन्य सदस्यों के साथ अहमदनगर किले में तीन साल तक रहे। इस दौरान उनका स्वास्थ्य भी दिनोंदिन गिरता जा रहा था, जिसे देखते हुए जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें रिहा करने की अपील की।
शिक्षक अतुल कुमार मिश्र ने कहा कि
गोविंद बल्लभ पंत ने 1914 में ही अंग्रेज़ों के खिलाफ बिगुल बजाना शुरू कर दिया था। इसके तहत उन्होंने कुली बेगार सिस्टम हटवाया। इस सिस्टम या कानून के तहत आम लोगों को अंग्रेज़ों का सामान कुली की तरह ढोना पड़ता था, लेकिन पंत ने इसके खिलाफ आवाज़ उठाई और उसे खत्म करके ही दम लिया।
शिक्षक रामजपित यादव ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पंडित गोविन्द बल्लभ पंत ने महात्मा गांधी के गुट और सुभाष चंद्र बोस के गुट के बीच एक टाई ब्रेकर के रूप में काम किया। गांधी का गुट अपने युद्ध के प्रयास में ब्रिटिश क्राउन का समर्थन करने की वकालत करता था, जबकि बोस का गुट किसी भी तरह से अंग्रेजी हुकुमत को बाहर निकालने के लिए स्थिति का लाभ उठाने की वकालत करता था। इस अवसर पर ग्राम प्रधान वृजेश यादव, विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष मोहन साहनी, अभिभावक ललिता देवी, सिरजावती देवी, दिव्या, कृष्णा राय, अंकुश साहनी, नूर आलम, दीपक, गोपाल, चन्दा साहनी आदि लोग उपस्थित रहें।

