*राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक संघ की पहल*
*शराब बंदी क्यु आवश्यक है*
एक नगर के सज्जन महापुरुष को एक बार अति आवश्यक कार्य होने से नगर के राजा से मीलना जरुरी हो गया था राजा के महल में प्रवेश करने हेतु चार दरवाजे लगें थे लेकिन दरवाजे मे प्रवेश करने हेतु कुछ अजीबो अजीब शर्त थी जो यहां प्रस्तुत है,
पहला दरवाजा…..पहले दरवाजे पर शर्त थी की वेश्या से भोग विलास करो…फिर चले जाना… वहाँ एक वेश्या खड़ी थी। शर्त लिखी थी— “वेश्या से संबंध बनाने पर ही दरवाजा खुलेगा।” सज्जन व्यक्ति ने इसे पाप समझा और आगे बढ़ गया….
दूसरा दरवाजा: वहाँ एक गाय बंधी थी। लिखा था— “गाय को लात मारने पर ही दरवाजा खुलेगा।” गाय को लात मारना अधर्म था, इसलिए वह यहाँ से भी लौट गया….
तीसरा दरवाजा: वहाँ मांस रखा था। शर्त थी— “मांस खाने के बाद ही प्रवेश मिलेगा।” उसने मांस को घृणा से देखा ओर चौथे दरवाजे की ओर बढ़ गया….
चौथा दरवाजा: वहाँ शराब की एक बोतल रखी थी। लिखा था— “पूरी बोतल पीने पर ही दरवाजा खुलेगा।” महल में जाना उसके लिए बहुत ज़रूरी था।
अतः उसने सोचा— “पिछली शर्तों की तुलना में यह कम अधर्म है।” उसने पूरी शराब पी ली…. शराब पीते ही उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई। नमकीन खाने की तलब हुई— उसने मांस खा लिया। मांस खाने से कामवासना जागी— उसने वेश्या से संबंध बना लिए। ओर सब करने पर उसे अपने आप पर गुस्सा आया तब उसने गुस्से में आकर गाय को भी लात मार दी। और अंत में— वह महल के अंदर चला गया।
मोरल (नीति शिक्षा): शराब ने उससे वे तीनों अपराध करवा दिए, जो वह जीवन भर कभी नहीं करना चाहता था। इसलिए शराब को हल्के में मत लीजिए। यह रिश्ते, धन-दौलत, परिवार, स्वास्थ्य और वर्षों में कमाया हुआ पुण्य— सब कुछ नष्ट कर देती है ,
*अतः मध्यप्रदेश राष्ट्रीय भ्रष्टाचार ईकाई चाहती है कि मध्यप्रदेश ही नहीं अपितु भारत वर्ष में शराब बंद हो*
जिससे अनाचार, अत्याचार, व्यभिचार, भ्रष्टाचार, दुराचार समाप्त हो सके

