श्रीमद्भागवत कथा:भगवान कृष्ण की बाल लीला सुन मुग्ध हुए श्रोता
महराजगंज,सदर तहसील अंतर्गत बल्लो खास तोला चिरैना पुर में आचार्य पण्डित हरिकेश शुक्ल ब्यास के द्वारा कथा परीक्षित पारस नाथ मिश्र व उनकी धर्म पत्नी रमआरती देवी को बेदव्यास की वाणी में आज श्रीकृष्ण के बाल लीलाओं का श्रवण कराया गया।संगीतमयी ध्वनियो से वातावरण भक्तिमय हो गया है।आचार्य जी नेे भगवान श्रीकृष्ण जन्म और बाल लीलाओं का वर्णन किया। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव श्रद्धालुओं ने धूमधाम से मनाया।कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने मानव को कर्म का ज्ञान दिया था।
व्यास जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण हिंदू धर्म में विष्णु के अवतार हैं। सनातन धर्म के अनुसार भगवान विष्णु सर्वपापहारी पवित्र और समस्त मनुष्यों को भेग तथा मोक्ष प्रदान करने वाले प्रमुख देवता हैं। जब-जब इस पृथ्वी पर असुर एवं राक्षसों के पापों का आतंक व्याप्त होता है तब-तब भगवान विष्णु अवतरित होकर पृथ्वी के भार को कम करते हैं। वैसे तो भगवान विष्णु ने अभी तक 12 अवतारों को धारण किया। इन अवतारों में उनके सबसे महत्वपूर्ण अवतार श्रीराम और श्रीकृष्ण के ही माने जाते हैंश्री कृष्ण का जन्म क्षत्रिय कुल में राजा यदु कुल के वंश में हुआ था। भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लेते ही कर्म का चयन किया। नन्हें कृष्ण द्वारा जन्म के छठे दिन ही शकटासुर का वध कर दिया, सातवें दिन पूतना को मौत की नींद सुला दिया। तीन महीने के थे तो कान्हा ने व्योमासुर को मार गिराया। प्रभु ने बाल्यकाल में ही कालिया वध किया और सात वर्ष की आयु में गोवर्धन पर्वत को उठा कर इंद्र के अभिमान को चूर-चूर किया। गोकुल में गोचरण किया तथा गीता का उपदेश देकर हमें कर्मयोग का ज्ञान सिखाया। प्रत्येक व्यक्ति को कर्म के माध्यम से जीवन में अग्रसर रहना चाहिए।
इस मौके पर कथा परीक्षित ,यतीन्द्र मिश्र,पीयूष मिश्र,शंभुशरण मिश्र,अवनींद्र कुमार मिश्र,राघव शरण मिश्र,शंभुशरण मिश्र,व समस्त ग्रामवासी आदि उपस्थित रहे।

