*कैंपियरगंज में स्कूल बंद होने से बढ़ी मुश्किलें:रिपोर्ट,रमाकात्त जायसवाल,2फरवरी*
★प्रबंधन की बढ़ी समस्याएं तो ऑनलाइन क्लास से शिक्षा और बच्चो का टीकारण प्रभावित
कैम्पियरगंज
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गत दो वर्षों से कोविड के चलते विद्यालयों के बन्द होने से प्रबंधक तथा प्रधानाचार्य सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। 31 दिसंबर के बाद स्कूल लगातार बंद रहने के कारण क्षेत्र के वित्तविहीन विद्यालयों के सामने संकट खड़ा हो गया है। स्कूल बंद रहने से बच्चे शुल्क नहीं जमा कर रहे हैं फल स्वरूप विद्यालय की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।
बीते वर्ष सितंबर से लेकर दिसंबर माह तक विद्यालय का संचालन हुआ कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव के बाद विद्यालय बंद हो गए हैं क्षेत्र के वित्तविहीन विद्यालय खुलने का इंतजार कर रहे हैं। स्कूल बंद होने और फीस न मिलने से आर्थिक संकट भी छाने लगा है।
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि जब फीस ही नहीं मिलेगी तो शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों को वेतन कैसे देंगे। ऐसे में कई स्कूलों ने वेतन में कटौती भी की है। वही लगातार स्कूल बंद रहने के कारण 15 से 18 वर्ष के बच्चों का टीकाकरण भी सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा है।
विद्यालय प्रबंधकों प्रधानाचार्य की प्रतिक्रिया अरूण रावत द सनराइज एकेडमी मीरपुर के प्रबंधक के अनुसार,कोरोना काल में सरकार के एक इशारे पर सभी विद्यालय के प्रबंधकों ने स्कूल बंद कर दिया। बच्चे शुल्क भी नही जमा किए, इससे शिक्षकों को वेतन देना अत्यंत कठिन हो गया है।
सरकार को चाहिए कि शिक्षकों के प्रति सहानुभूति जताते हुए आर्थिक सहायता मुहैया कराए। मंजू सिंह-प्रधानाचार्य परम ज्योति इंटर कॉलेज,रसूलपुर चकिया के मुताबिक महामारी के दौर में वित्तविहीन शिक्षक का दर्द कोई समझने वाला नहीं है।
शिक्षको के आगे रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है, वहीं विद्यालय बंद होने से बच्चों का टीकाकरण भी प्रभावित हो रहा है। डॉ दिलीप कुमार सिंह, प्रबंध निदेशक ए यन सिंह बलुआ सिहोरवा ने कहा की, कोरोना महामारी मेंअचानक स्कूल बंद हो जाने से शुल्क नहीं प्राप्त हो रहा है।
वेतन न दे पाने के वित्तविहीन शिक्षकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इस कठिन दौर में वे अपना व अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करेंगे, विद्यालय को बस का लोन किस्त और बिजली बिल जमा करना पड़ रहा है।

