*मुस्लिम वोट के लिए आजकल तमाम नेता जिन्ना की खूब तारीफ कर रहे हैं।*
इसमें अखिलेश यादव भी है और दूसरी अन्य पार्टियों के कुछ नेता भी है। जबकि मोहम्मद अली जिन्ना स्वतंत्रता संग्राम में कभी हिस्सा नहीं लिया था
मोहम्मद अली जिन्ना एक बार भी आजादी के आंदोलन में जेल तो छोड़िए पुलिस स्टेशन भी नहीं गया था। वह एक बहुत बड़ा वकील था। मोहम्मद अली जिन्ना की उस जमाने में बहुत ऊंची फीस हुआ करती थी फिर भी वह जिहादियों का केस बिल्कुल मुफ्त लड़ता था
लाहौर में रहने वाले एक प्रकाशक महाशय राजपाल जी के हत्यारे अलामुद्दीन का केस मोहम्मद अली जिन्ना ने बिल्कुल मुफ्त लड़ा था यहां तक कि मोहम्मद अली जिला उसकी सजा माफी के लिए लंदन तक गया था
एक और जिहादी आतंकी अब्दुल अजीज ने 1927 में महाशय राजपाल की जगह स्वामी सत्यानंद जी महाराज को महाशय राज्यपाल समझकर उन्हें मार दिया था तब मोहम्मद अली जिन्ना ने उसका भी केस बिल्कुल मुफ्त लड़ा था और उसकी भी फांसी के खिलाफ मोहम्मद अली जिन्ना लंदन गया था
लेकिन मोहम्मद अली जिन्ना खुद इस्लाम के कट्टरपंथ से दूर रहता था वह जमकर पोर्क यानी सूअर का मांस खाता था जिसने जिंदगी में कभी नमाज नहीं पढ़ा उसने जिंदगी में कभी हज यात्रा नहीं किया जबकि उसके पास अकूत दौलत थी उसके पास मुंबई में उस जमाने में 48 कमरों का विशाल बंगला था कराची और लाहौर में भी उसके बंगले थे लंदन में भी उसका घर था
दरअसल तमाम मस्जिदों में मोहम्मद अली जिन्ना को एक सच्चा मुस्लिम बताया जाता है क्योंकि उसने इस्लामिक उम्मत को दो नए इस्लामिक मुल्क दिए और मोहम्मद अली जिन्ना ने भारत में 6 लाख से ज्यादा हिंदू और सिखों का कत्लेआम करवाया था
उसमें से 10000 हिंदू अकेले कोलकाता में 5000 हिंदू ढाका और मुर्शिदाबाद में और 3000 हिंदू नोआखली में जिन्ना के डायरेक्ट एक्शन डे के आह्वान पर कत्ल कर दिए गए थे
यही कारण है कि मुस्लिम लोगों के बीच में जिन्ना इतना लोकप्रिय है और अगर लोकप्रिय नहीं भी है तो भी अखिलेश यादव जिन्ना को लोकप्रिय कराना चाह रहे हैं
और यही कारण है कि आज समाजवादी पार्टी और समाजवादी पार्टी की सहयोगी पार्टियां जिन्ना का इतना गुणगान कर रही है।

