लड़की के स्तन शरीर का वो भाग है जो एक पुरुष को सबसे ज्यादा आकर्षित करते है,एक सभ्य स्त्री अगर बाहर निकलती है तो शरीर के इस हिस्से को कई लेयर में ढका जाता है, जिससे लडको की नजर से इसे बचाया जा सके
लेकिन इसकी जरूरत क्यों पड़ रही ?? कभी सोचा है
क्योंकि समाज ने इसे संभोग के लिए एक जरूरी अंग के रूप में दर्शाया है, शुरुवात यहीं से होती है लड़की जवान हुई है, जवानी की दहलीज पर है या जवानी ढल रही है इसका सूचक भी इसी अंग के आधार पर किया जाता है
इसे ऐसे दर्शाया गया है जिसके जीतने सुडौल स्तन वो इतना ज्यादा खूबसूरत, और जो चीज खूबसूरत होती है उसे कहीं दिखाया नहीं जाता छुपाया जाता है
और जो चीज छिपाई जाती है उसे देखने के छूने लालसा उतनी अधिक होती है हर व्यक्ति उसे पाने की होड़ में लगा रहता है
लेकिन आज ये लेख पढ़ने के बाद शायद समाज को सीख मिले और लड़कियों के स्तन के प्रति उनकी धारणा बदल जाए
जब एक बच्चा पैदा होता है, तो उसे पोषण देने का काम स्तन का होता है महिला के शरीर में भोजन से ऊर्जा बनती है और ये ऊर्जा खाए गए पदार्थ को दुग्ध ग्रंथियों की सहायता से दूध का उत्पादन करते हैं और जब आप शिशु थे तब आपका पोषण इसी दूध से होता था, यदि स्तन ना होते तो शायद आज हमारा आपका अस्तित्व ही नहीं रहता
लेकिन कभी सोचा है, की यदि मां को जुखाम हुआ हो तो। उसके बच्चे को हो जाता है….
मां यदि खट्टा खाए तो बच्चे को उल्टियां होती है
मां का पेट खराब हो तो बच्चे को गैस बनती है पेट में दर्द होता है ?
ऐसा इस लिए क्यों की ये अंग एक मां और उसके बीच की शारीरिक जरूरतों के बीच संचार स्थापित करता है
बच्चे का शरीर इतना ताकतवर नहीं होता कि वो खुद अपने लिए जरूरी विटामिन मिनरल हार्मोन बना सकता है
लेकिन शरीर को जब जिस चीज की जरूरत होती है तो मां के शरीर को सिग्नल जाता है और वो उन सभी जरूरी चीजों की पूर्ति दूध के माध्यम से करता है
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बहुत कम मां होंगी जो कभी अपने बच्चों का बुरा सोचती है एक मां ही है जो अपने बच्चे के लिए अपनी जान दे देती है, बिना किसी परवाह या स्वार्थ के बच्चे का पालन पोषण करती है
उसका कारण है बच्चे के प्रति भावनात्मक जुड़ाव, और या जुड़ाव एक विशेष प्रकार के हार्मोन के कारण होता है
जो बच्चे और मां दोनों के शरीर में मिलते है, और उनके भावनात्मक जुड़ाव का कारण बनती है
जिन लोगों को लगता है कि ये एक भोग मात्र का साधन है तो उन्हें इसे पढ़ना चाहिए और समझना चाहिए कि ये भोग नहीं बल्कि जीवन देने वाला अंग है
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