मत रो मां, मैं संभालूंगा पूरा परिवार, पापा से बहुत कुछ सीखा है…रोती मां का हाथ पकड़कर जब मासूम बेटे ईशान ने यह बात बोली तो, यह सुनकर हर कोई रो पड़ा।
मासूम को पकड़कर उसके दादा लिपट गए।
अम्बरीश की दीपाली से साल 2012 जून में शादी हुई थी।
जबकि 11 जून को अम्बरीश का जन्मदिन भी पड़ता था।
पत्नी ने बताया कि जन्मदिन और शादी की सालगिरह साथ में सेलिब्रेट करते थे।
गोरखपुर के पार्क रोड पर रहने वाले अम्बरीश श्रीवास्तव (40) की अचानक हुई मौत से पूरे परिवार और इलाके में गहरा शोक व्याप्त है।
शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद जब उनका शव करीब शाम चार बजे उनके आवास पर पहुंचा, तो वहां मौजूद परिजनों के बीच चीख-पुकार मच गई।
घर का माहौल बेहद गमगीन हो गया।
जैसे ही परिजनों ने अम्बरीश का शव देखा, उनके बुजुर्ग पिता की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वे अपने बेटे की लाश देखकर फफक पड़े। वहीं, छोटे भाई नितिन और दोनों बेटे अपने पिता के शव से लिपटकर रोने लगे।
परिवार के इस दर्दनाक दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। अम्बरीश का छोटा बेटा वीर अपने चाचा नितिन से लिपटकर सिसकता रहा। भतीजे को इस तरह बिलखते देख नितिन भी खुद को संभाल नहीं पाए और उसे सीने से लगाकर रोने लगे। आसपास खड़ी महिलाएं और रिश्तेदार बच्चों का दर्द देखकर भावुक हो उठे और माहौल और भी मार्मिक हो गया।
पत्नी बोलीं- बच्चों का क्या होगा…
जब शव को अंतिम संस्कार के लिए राजघाट ले जाया जा रहा था, उस समय अंतिम दर्शन के दौरान एक और बेहद भावुक क्षण सामने आया। अम्बरीश की पत्नी दीपाली, अपनी ननद पारूल श्रीवास्तव (जो अहमदाबाद से आई थीं) से लिपटकर रोते हुए बार-बार यही कहती रहीं कि अब उनका और बच्चों का क्या होगा।
इसी बीच उनका बड़ा बेटा ईशान अपनी मां का हाथ पकड़कर बोला, “मां रोओ मत, मैं हूं ना। मैं पूरे परिवार को संभालूंगा।” आंखों में आंसू लिए बेटे के इन शब्दों ने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया।
वहीं छोटा बेटा अपने चाचा से लिपटकर बार-बार पूछता रहा, “पापा को क्या हुआ? उन्हें उठाइए न चाचा।” यह सुनकर वहां मौजूद लोगों का दिल दहल उठा।
अम्बरीश की मौत की सूचना के बाद पार्क रोड स्थित आवास पर सुबह से ही लोगों का भीड़ लगना शुरू हो गया। शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी, जनप्रतिनिधि, छात्रनेता और परिचितों के साथ सैकड़ों लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचने लगे।
पोस्टमार्टम के दौरान एम्स परिसर में भी बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। दोपहर बाद करीब चार बजे जैसे ही उनका शव आवास पर पहुंचा, वहां पहले से मौजूद लोगों की भीड़ और बढ़ गई। अम्बरीश की शहर में एक अलग पहचान थी।
सामाजिक कार्यक्रमों से लेकर बड़े आयोजनों तक उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी, यही वजह रही कि उनके निधन की खबर सुनते ही हर वर्ग के लोग उनके घर पहुंच गए। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात रहा, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और व्यवस्था बनी रहे।

