महाव नाले का तटबंध टूटा, सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न! किसानों का सवाल—मुआवजा देगा सिंचाई विभाग या सरकार?
*लापरवाही के आरोपों से घिरा सिंचाई विभाग, करोड़ों खर्च के बावजूद नहीं बच सका तटबंध; किसानों ने डीएम से की दोषियों पर कार्रवाई और मुआवजे की मांग।*
महराजगंज। महाव नाले का तटबंध टूटने से आसपास के गांवों के किसानों पर भारी संकट आ खड़ा हुआ है। नाले का पानी खेतों में घुसने से धान सहित अन्य खरीफ फसलें जलमग्न हो गईं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। अपनी मेहनत को बर्बाद होते देख किसानों में सिंचाई विभाग के प्रति जबरदस्त आक्रोश है।
किसानों का आरोप है कि यदि सिंचाई विभाग समय रहते तटबंध की मरम्मत और निगरानी करता तो यह स्थिति पैदा नहीं होती। उनका कहना है कि महाव नाले के रखरखाव और मरम्मत पर हर वर्ष लाखों-करोड़ों रुपये खर्च होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। तटबंध टूटने की घटना के बाद विभागीय कार्यप्रणाली अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि उनकी फसलों का तत्काल सर्वे कराया जाए और नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों का कहना है कि आखिर उनकी बर्बाद हुई फसल की भरपाई कौन करेगा—सिंचाई विभाग या उत्तर प्रदेश सरकार?
किसानों ने जिलाधिकारी से भी सवाल किया है कि सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारी आखिर किस गहरी नींद में सोए थे, जो समय रहते तटबंध की स्थिति पर ध्यान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण और रखरखाव होता तो आज हजारों किसानों की मेहनत पानी में नहीं बहती।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तटबंध टूटने के कारणों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए तथा प्रभावित किसानों को शीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि यदि समय रहते राहत और मुआवजा नहीं मिला तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

