पंजाब के फाजिल्का (अबोहर) में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। एक मां (सुमन) ने अपनी बहू की प्रताड़ना और अपने ही घर में बेगाना किए जाने के दर्द से टूटकर सुसाइड कर लिया। मरने से पहले उन्होंने अपनी बहू को जो आखिरी संदेश भेजा, वह एक मां की बेबसी और गुस्से की पराकाष्ठा है।
📍 मंदिर में दर्शन किए और फिर मौत को गले लगाया
21 अप्रैल की शाम सुमन अपनी स्कूटी से बालाजी मंदिर गईं। वहां दर्शन करने के बाद वह नहर किनारे पहुँचीं और अपनी बहू आईना को 15 मिनट का एक इमोशनल ऑडियो मैसेज भेजा। ऑडियो भेजने के तुरंत बाद उन्होंने नहर में छलांग लगा दी।
🎤 “तूने मेरा मंदिर जैसा घर बर्बाद कर दिया”— आखिरी शब्द
ऑडियो में सुमन ने अपनी मौत के लिए बहू को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा:
• “तुमने मुझे मेरे बेटे से अलग कर दिया, मुझे मेरी पोती को उठाने तक नहीं देती।”
• “जिस तरह मैं आज अपनी औलाद के लिए तड़प रही हूं, वैसे ही तू भी तड़पेगी।”
हैरानी की बात यह है कि बहू ने यह ऑडियो मिलने के 15 मिनट बाद अपने पति (सुमन के बेटे) को फॉरवर्ड किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
💔 14 दिन पहले ही घर आई थी ‘नन्ही परी’
मृतका के बड़े बेटे रोहित ने बताया कि 14 अप्रैल को ही उनके घर बेटी का जन्म हुआ था। घर में खुशियाँ होनी चाहिए थीं, लेकिन पत्नी आईना लगातार क्लेश करती थी। वह चाहती थी कि रोहित अपनी मां को छोड़ दे या उन्हें कहीं अलग शिफ्ट कर दे। जब भी शादीशुदा बहनें अपनी मां से मिलने आतीं, तो बहू घर में हंगामा खड़ा कर देती थी।
🚔 बहू फरार, 5 लोगों पर मुकदमा दर्ज
सास की मौत की खबर सुनते ही बहू घर में रखा सारा सोना समेटकर फरार हो गई। पुलिस ने रोहित के बयानों के आधार पर:
• पत्नी (आईना), सास, ससुर, साले और बुआ के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया है।
💬 परिवारों में बढ़ते क्लेश के आपसी समझदारी व स्थिर चिंतन के बाद कम किया जा सकता है
1. बुजुर्गों का सम्मान: क्या आज के दौर में ‘न्यूक्लियर फैमिली’ की चाहत इतनी बढ़ गई है कि हम अपने माता-पिता को ही बोझ समझने लगे हैं?
2. बहू और सास का रिश्ता: एक घर को मंदिर बनाने की जिम्मेदारी सबकी होती है, लेकिन क्या महज झगड़ों के कारण किसी को सुसाइड के लिए मजबूर करना सही है?
3. बेटे की बेबसी: उस बेटे पर क्या गुजर रही होगी जिसकी माँ और पत्नी के बीच का विवाद इस खौफनाक अंजाम तक पहुँचा?
इस कहानी को पढ़ने के बाद ये जरूर सोचें कि हमारे बुजुर्ग माता-पिता क्या बच्चों पर बोझ है , ऐसे भावनाओं को हम दिल में क्यों रखते हैं, क्यों नहीं हम सोचते हैं कि उन्हीं का देश है कि इस खुबसूरत दूनिया में मानव के रूप में जन्म लिए , हम मां बाप के एहसान को कभी चूका नहीं सकते हैं। दिवंगत सुमन जी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें । 👇
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