गोरखपुर। निजी अस्पतालों और दलालों के गठजोड़ का एक और मामला सामने आया है। प्रसव के बाद गंभीर हालत में बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर किए गए नवजात को दलालों ने बेहतर इलाज के नाम पर निजी अस्पताल पहुंचा दिया।
वहां तीन दिन तक इलाज के बाद नवजात की मौत हो गई। स्वजन का आरोप है कि भारी-भरकम बिल का भुगतान न करने पर अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे का शव नहीं दिया। चौरीचौरा निवासी दिहाड़ी मजदूर राजू गुप्ता ने सीएमओ से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है।
राजू ने बताया कि सोमवार को पत्नी गोल्डी को प्रसव पीड़ा होने पर जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगले दिन प्रसव हुआ, लेकिन नवजात की हालत नाजुक बताकर उसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में रेफर कर दिया गया।
जब वह बच्चे को लेकर वहां पहुंचे, तो बालरोग संस्थान के बाहर मौजूद दलालों ने घेर लिया और बेहतर इलाज का झांसा देकर पास के एक निजी अस्पताल लेकर चले गए। वहां भर्ती कराते ही 50 हजार रुपये जमा करा लिए गए, इसके लिए परिवार को जेवर तक गिरवी रखने पड़े।
तीन दिन तक इलाज का भरोसा दिया जाता रहा और बाहर से महंगी दवाएं मंगवाई जाती रहीं। गुरुवार को स्वजन को जानकारी मिली कि नवजात की मौत हो चुकी है। इसके बाद अस्पताल ने कुल 1.20 लाख रुपये का बिल थमा दिया और शेष 70 हजार रुपये जमा करने का दबाव बनाया।
पैसे न होने की बात कहने पर अस्पताल ने शव देने से इनकार कर दिया। इस मामले में सीएमओ डॉ. राजेश झा ने बताया कि प्रकरण बेहद गंभीर है और इसकी जानकारी अभी मिली है। जांच के लिए टीम भेजी जाएगी। स्वजन को शव दिलाने के साथ ही दोषी पाए जाने पर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

