मैं स्वाति मालीवाल……
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष के तौर पर मैंने नर्क के वो दरवाजे देखे हैं जिन्हें देखकर किसी की भी रूह कांप जाए।
GB रोड की उन अंधेरी कोठरियों में जब मैंने उस 15 साल की बच्ची को देखा…..
तो एक पल के लिए मुझे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ। उसकी उम्र कागजों पर 15 साल थी।
लेकिन उसका शरीर किसी 30 साल की औरत जैसा भारी और विकसित दिख रहा था।
यह कोई कुदरत का खेल नहीं……
बल्कि उन दरिंदों की रूह कंपा देने वाली साज़िश थी।
जांच में जो सच सामने आया वो कलेजा चीर देने वाला था।
उस बच्ची को सिर्फ 9 साल की उम्र में अगवा करके लाया गया था। उसे सालों तक अंधेरे कमरों में कैद रखकर हर रोज Oxytocin (ऑक्सीटोसिन) के इंजेक्शन लगाए जाते थे।
जानते हैं क्यों?
ताकि वो मासूम बच्ची वक्त से पहले ‘बड़ी’ और ‘जवान’ दिखने लगे, ताकि उसके जिस्म का सौदा ऊँची कीमतों पर किया जा सके।
उन इंजेक्शनों ने उस छोटी सी जान के हार्मोन्स और शरीर को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया था।
15 साल की उम्र में उसका शरीर बूढ़ा होने लगा था और हड्डियां जवाब देने लगी थीं।
उस बच्ची ने रोते हुए बताया कि जब वो सुई उसके जिस्म में चुभोई जाती थी…..
तो उसे असहनीय दर्द होता था।
पर चिल्लाने पर उसे और पीटा जाता और नशे की दवाइयां दी जाती थीं।
उन दरिंदों ने सिर्फ उसका बचपन नहीं छीना।
बल्कि उसके शरीर को रसायनों के दम पर एक मशीन बना दिया। जब हमने उसे निकाला…..
तो वो कांपते हुए बस एक ही बात पूछ रही थी—
“दीदी, क्या मेरा शरीर वापस पहले जैसा होगा?
क्या मेरी माँ मुझे पहचान पाएगी?”
9 साल की वो गुड़िया, जिसे स्कूल जाना था।
उसे इन भेड़ियों ने इंजेक्शनों के दम पर वक्त से पहले जवान बना दिया ताकि वो अपनी तिजोरियां भर सकें।
यही वो खौफनाक हकीकत है जो GB रोड की ऊंची दीवारों के पीछे दफन है।
उसी दिन मैंने कसम खाई थी कि इन इंजेक्शनों का धंधा करने वाले और बचपन का कत्ल करने वाले इन माफियाओं को मैं कभी चैन से नहीं बैठने दूंगी।
ये जंग तब तक जारी रहेगी, जब तक हर ‘गुड़िया’ सुरक्षित नहीं हो जाती।

