*सम्पादकीय*
✍🏾जगदीश सिंह सम्पादक✍🏾
*बुरे काम का बुरा नतीजा ना मानो तो कर देखो*!!
*जिसने जिसने कीया है यारो उसका उसका घर देखो*!!
जिंदगी के जलते सवालात में जब वक्त बेकाबू होता है तब हंसती खेलती उफान भरती ,मुस्कराती, इठलाती, कुलांचे भरती , दुनियां को मुट्ठी में भर लेने के हौसले और जज्बे के साथ हर किसी को रौंद देने की क्षमता का उन्माद लिए इन्सान जिस दिन शैतानी कर्मों की राह पर चल निकलता है।उसी दिन से उसकी बर्बादी की इबारत मालिक लिखना शुरू कर देता है। एक दिन उसके कर्मों की सजा कानून के कठोर व्यवस्था में सिर्फ हवालात हो जाती है।आजकल उन्मादी विचार धारा के जज्बाती खेल में शामिल होने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बदलता परिवेश सख्त संदेश भी दे रहा है, जीवन अनमोल है, यह धरती गोल है? कुछ भी असहज करके कोई भी सुरक्षित नहीं रह सकता है!सामाजिक मर्यादा में रहने वाला हर इंसान स्वाभिमान के साथ आत्म सम्मान के धरातल पर मजबूती से सभ्य समाज मे सहभागिता निभाते हुए सुखमय सुंदर सर्वांगीण विकास के तरफ सम्वृधि सम्पन्नता के आवरण में आखरी सफर का समापन करने में सक्षम हो जाता है। आजकल एक नया प्रचलन वजूद में आ गया है अहम और घमंड का तांडव चल रहा है!जब की पता सभी को है युग बदल चुका है! फिर भी वर्चस्व में अपना सर्वस्व स्वाहा कर रहे हैं! प्रारब्धीय ब्यवस्था के पारितोषिक स्वरूप अगर शानदार मजबूत ओहदे के मालिक तकदीर ने बना दिया तो उसके सम्मान में कसीदे स्वभाव में शामिल हो जाना ही उत्कृष्टता की पहचान बन जाना चाहीए। वर्तमान मे हर आदमी असमंजस में है! कब क्या हो जाये पता नहीं! हिसाब तो सभी का परमात्मा के दरबार में होना है।कल एक चर्चित घटना के सन्दर्भ में पुलिस विभाग के सेवानिवृत्त दरोगा ने बताया सुनकर चौंकना लाज़िम था।उन्हीं का विभाग सेवानिवृत्त के एक महिने बाद ही पारिवारिक मामूली विवाद में दर्ज साधारण मुकदमों का उल्लेख करते हुए उनको धाने का हिस्ट्रीशीटर बना दिया! इतना ही नहीं एक ही बिरादरी के अन्य पांच ऐसे युवको को हिस्ट्रीशीटर बना दिया जिन पर मामुली मुकदमे दर्ज थे। वर्दी के हनक में जीवन भर रौब गांठने वाले दरोगा जी अफसोस कर रहे थे!यही तकदीर के फंसाने है आज उनका ही विभाग हर रात उनका हिसाब लेता है।अहम के वहम में ग़लत करके कोई भी बच नहीं सकता यह अलग बात है आज वक्त साथ है मुस्करा लो भाई लेकिन एक दिन पश्चाताप के आंसू में चेहरा भिगोना ही पड़ेगा!सच के सतह में जो मिला वह आश्चर्यजनक रूप से अविश्वसनीय ही लग रहा था।एक जाति से जलन रखने वाले उस दरोगा को आला अफसरान थाने का आला हुक्मरान बना दिए खैर वह उसकी किस्मत लेकिन जिसने अनदेखी किया जीवन के आखरी सफर मे वे आबरू होकर चर्चा का विषय बन गया!वक्त का मिजाज कब बदल जाये किसे पता! लेकिन जो भी ग़लत करेगा वह इसी जन्म में भरेगा।!किसी को बे आबरू कर खुद को आबरू में गबरू कोई नहीं बन सका। समय के साथ तकदीर का फ़साना भी बदलता है।जीरो से हीरो और हीरो से जीरो बनने में समय नही लगता। दिसम्बर साल का आखरी महीना किसी की तबाही तो किसी के भाग्य को नगीना बना दिया।कर्म फल सभी को भोगना है मत किसी की बद्दुआ! मत किसी की आह लो भाई ओहदा हमेशा नहीं रहेगा! धन लक्ष्मी के मोहपाश में बंधकर जिनके लिए कुकर्म कर रहे हो वहीं अधर्म एक दिन तेरे विनाश का कारण भी बनेगा। सबका मालिक एक ऊं साई राम🙏🏾🙏🏾
जगदीश सिंह सम्पादक राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत 7860503468