आखिर कौन है आईपीएस विनय तिवारी. क्या गोपालगंज से पहले भी रहा नाता।
बिहार सरकार ने बड़े पैमाने पर भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियो का तबादला कर दिया है।
इसी कड़ी में गोपालगंज पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात अवधेश दीक्षित का भी तबादला करते हुए सरकार ने विनय तिवारी को गोपालगंज पुलिस अधीक्षक की नई जिम्मेदारी सौपी है।
आईए जानते हैं, आखिर कौन है?
आईपीएस विनय तिवारी
बता दे की विनय तिवारी के लिए गोपालगंज कोई नया जिला नहीं है।
जिले की कमान संभालने से पहले भी उनका यहाँ से गहरा जुड़ाव रहा है।
विनय तिवारी इससे पहले गोपालगंज में अपर पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात रह चुके हैं।
जिले की भौगोलिक स्थिति और यहाँ के अपराध के पैटर्न से वह बखूबी वाकिफ हैं।
उनके पुराने कार्यकाल को देखते हुए स्थानीय जनता में अपराधियों पर नकेल कसने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
सुशांत सिंह राजपूत केस और ‘मुंबई क्वारंटाइन’ विवाद.
विनय तिवारी राष्ट्रीय स्तर पर तब चर्चा में आए थे ।
जब साल 2020 में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जांच करने वह पटना से मुंबई गए थे।
उस दौरान मुंबई नगर निगम (BMC) ने उन्हें जबरन क्वारंटाइन कर दिया था।
इस घटना के बाद वह रातों-रात पूरे देश में प्रसिद्ध हो गए।
लोगों ने उन्हें एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में देखा।
जिसे सिस्टम ने काम करने से रोकने की कोशिश की.
’अपराधियों के लिए महाकाल’
2015 बैच के आईपीएस अधिकारी विनय तिवारी को उनकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के लिए जाना जाता है।
वह फील्ड पर उतरकर लीड करने वाले अधिकारियों में गिने जाते हैं।
विनय तिवारी को आधुनिक तकनीक और डेटा के जरिए केस सुलझाने में महारत हासिल है।
भोजपुर और समस्तीपुर जैसे जिलों में एसपी रहते हुए उन्होंने शराब माफियाओं और बड़े अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त किया था।
जिसके कारण अपराधी उन्हें अपना काल मानते हैं।
गोपालगंज में अपराध पर नियंत्रण और कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी।
अपनी पुरानी यादों और नए जोश के साथ विनय तिवारी की यह पारी गोपालगंज के लिए काफी अहम मानी जा रही है.

