यूपी में जमीनों की रजिस्ट्री में बड़ा खेल हो रहा है।
सरकारी ऑफिस के बाबू रजिस्ट्री कराने के लिए गलत तरीके से जमीन का लैंड यूज चेंज करा रहे हैं।
दलाल तो इनसे भी दो कदम आगे हैं।
वे तो गारंटी दे रहे हैं कि रजिस्ट्री में 50% की बचत करा देंगे।
दरअसल, राजस्व विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल, 2025 में जमीन विवाद के 11.20 लाख मामले पेंडिंग हैं।
ये राजस्व कोर्ट में चल रहे हैं। इनमें फर्जी रजिस्ट्री, सीमा विवाद, लैंड यूज बदलने जैसे मामले शामिल हैं।
इस रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ज्यादातर मामलों की जड़ गलत रजिस्ट्री है।
हाल ही में यूपी के पूर्व IG अमिताभ ठाकुर को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
26 साल पहले उनकी पत्नी नूतन ठाकुर ने देवरिया में फर्जी डॉक्यूमेंट से औद्योगिक क्षेत्र में प्लॉट लिया और मुनाफा कमाकर बेच दिया।
बांदा जिले के अतर्रा सब-रजिस्ट्रार ऑफिस का बाबू बबलू पैसा लेकर आवासीय भूमि की रजिस्ट्री कृषि भूमि में करा देता है।
इसके लिए हमने बांदा जिले के एक गांव की दो जमीन के डॉक्यूमेंट अरेंज किए।
ये दोनों जमीन आबादी क्षेत्र की हैं, यानी नियमानुसार इसकी रजिस्ट्री आवासीय भूमि के रूप में ही हो सकती है।
कृषि भूमि के रूप में रजिस्ट्री नहीं हो सकती।
अब बाबू बबलू से संपर्क किया। उन्होंने हमें कृषि भूमि के नाम पर रजिस्ट्री का पूरा गणित और खेल बताया।
दलाल बताते है की जो आबादी की जमीन की रजिस्ट्री कृषि भूमि में कराना चाहते हैं, ये दलाल इनकी सेटिंग बाबुओं से करा देते हैं।
अब हम बांदा सिटी सदर तहसील के रजिस्ट्रार ऑफिस पहुंचे, यह जानने के लिए कि अतर्रा की तरह यहां भी गलत तरीके से रजिस्ट्री होती है या नहीं?
यहां मामला अलग निकला।
यहां बाबू सीधे डील नहीं करते, वे दलालों के माध्यम से ही काम करते हैं।
यहां जब हम दलालों से मिले तो उन्होंने काम की गारंटी दे दी।
आबादी भूमि की रजिस्ट्री आबादी भूमि में ही कराना है तो पुरानी रजिस्ट्री या विरासत दस्तावेज, खसरा, खतौनी, गाटा नंबर, ग्राम पंचायत से जारी प्रमाण पत्र, भूमि का नक्शा लगाना जरूरी है।
अब आबादी भूमि की रजिस्ट्री कृषि भूमि के नाम पर करने के लिए रजिस्ट्री ऑफिस के बाबू खसरा नहीं लगाते हैं, क्योंकि खसरा में यह लिखा होता है कि ये भूमि आवासीय है या कृषि।
इसके बाद कृषि भूमि के नाम पर रजिस्ट्री कर देते हैं।

