संभोग वह इकलौती रस्सी है जिससे बीवी अपने पति को बाँधकर रख सकती है। जितना ज्यादा कोई मर्द सेक्स का शौक़ीन होता है, उतना ही वह बीवी के स्पर्श का आदी हो जाता है। नशेड़ी हमेशा नशा देने वाले का ग़ुलाम होता है।
लेख – दीपक कश्यप (डबल इंजन की सरकार) गोरखपुर महाराजगंज
लेकिन मुश्किल तब पैदा होती है जब औरत इस नशे को अपना हथियार बनाने की बजाय इसे रोककर पति को आज़माने लगती है।
वह समझती है कि बच्चे हो चुके, घर बस चुका, अब पति कहीं नहीं जाएगा। मगर यही सबसे बड़ी भूल होती है…
बीवी जब बार-बार पति की शारीरिक प्यास को टालती है, नखरे दिखाती है, तो पति को बीवी ज़हर लगने लगते हैं। यह रिश्ता धीरे-धीरे खोखला होने लगता है।
ज़्यादातर औरतें बच्चों के बाद समझती हैं कि अब उनका पति कहीं नहीं जाएगा, अब तो वह सुरक्षित हो चुकी हैं। लेकिन यही ग़लतफ़हमी अक्सर घरों की बर्बादी की शुरुआत बन जाती है।
दूसरी शादी करने वाले मर्दों की अक्सर यही औरतें बीवियाँ होती हैं जिन्होंने रिश्ते को सिर्फ़ ज़िम्मेदारी समझकर निभाया, मोहब्बत और हवस से महरूम रखा। मर्द को रोका जा सकता है, बाँधा जा सकता है… लेकिन सिर्फ़ तब, जब उसकी प्यास बीवी के स्पर्श से बुझे। वरना वह प्यास कहीं और से बुझाने का रास्ता खुद बना लेता है।
औरतें अगर सच में अपने पति को जोड़े रखना चाहती हैं पति की असली मंज़िल बन जाएँ।
घर सिर्फ़ दुआओं से नहीं चलते, बल्कि उन शारीरिक हक़ीक़तों से बंधे होते हैं जिन्हें अक्सर झिझक या शर्म के नाम पर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
अगर बीवी खुद को पति की ज़रूरत नहीं, सिर्फ़ फ़र्ज़ समझने लगे…तो एक दिन पति भी फ़र्ज़ अदा करके किसी और की हवस बनने निकल पड़ता है।
#बेटे_हैं_कोई_खिलौना_नही

