राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत : नेतृत्व, योगदान और अपेक्षाएँ
राष्ट्रीय पर्यवेक्षक की कलम से
राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत आज के समय में पत्रकारों के अधिकार, सुरक्षा, सम्मान और पेशेवर गरिमा के लिए संघर्षरत एक उभरता हुआ, सशक्त और विश्वसनीय संगठन बनकर सामने आया है। यह संगठन केवल एक मंच नहीं, बल्कि विचार, संघर्ष, अनुशासन और समर्पण की जीवंत धारा है, जिसमें देश के विभिन्न कोनों से जुड़े पत्रकार अपनी भूमिका निभा रहे हैं। वार्षिक अधिवेशन से पूर्व यह आवश्यक है कि संगठन के सक्रिय, प्रभावशाली एवं जिम्मेदार पदाधिकारियों के योगदान का निष्पक्ष, समीक्षात्मक एवं रचनात्मक अवलोकन प्रस्तुत किया जाए, जिससे संगठन और अधिक सुदृढ़ बन सके।
राष्ट्रीय नेतृत्व : अनुभव और दृष्टि का संगम
राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय जगदीश सिंह का व्यक्तित्व संगठन की रीढ़ के समान है। वे पूर्व में कई संगठनों में वरिष्ठ पदाधिकारी रह चुके हैं तथा पत्रकारिता जगत में दशकों का अनुभव रखते हैं। शिक्षा, विधि और प्रशासन—तीनों क्षेत्रों का उनका गहन ज्ञान उन्हें एक विशिष्ट नेतृत्वकर्ता बनाता है। एक विधि विशेषज्ञ अधिवक्ता होने के साथ-साथ पुलिस एवं प्रशासनिक सेवाओं का अनुभव भी उनके पास है, जिससे संगठन को नीतिगत, कानूनी एवं प्रशासनिक स्तर पर मजबूती मिलती है। उनके सान्निध्य में संगठन संतुलन, अनुशासन और स्पष्ट दिशा के साथ आगे बढ़ रहा है।
महिला नेतृत्व की सशक्त उपस्थिति
राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष पूनम सिंह संगठन के लिए एक सशक्त स्तंभ हैं। वे शिक्षा जगत से जुड़ी हुई हैं, एक समर्पित अध्यापिका हैं तथा स्काउट एंड गाइड जैसी संस्थाओं में भी नेतृत्वकारी भूमिका निभा चुकी हैं। महिलाओं और पुरुषों—दोनों के बीच उनकी स्वीकार्यता, मुखरता और कार्यशैली संगठन को सामाजिक स्तर पर व्यापक प्रभाव प्रदान करती है। उनका नेतृत्व महिला पत्रकारों के आत्मविश्वास और सहभागिता को नई ऊर्जा देता है।
अंतरराष्ट्रीय विस्तार की मजबूत नींव
अंतरराष्ट्रीय संरक्षक संयोजक मंडल के अध्यक्ष अजय कुमार उपाध्याय का योगदान संगठन के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित किया जाना चाहिए। लगभग 20 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने संगठन को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने का कार्य किया। देश-विदेश में पत्रकारों को संगठन से जोड़कर उन्होंने ऐसे “अनमोल हीरे” संगठन को दिए हैं, जो इसकी भविष्य की पूंजी हैं। वैचारिक मतभेद लोकतांत्रिक संगठनों की स्वाभाविक प्रक्रिया हैं, किंतु मनभेद से ऊपर उठकर संगठनहित को प्राथमिकता देना उनकी सबसे बड़ी विशेषता रही है। गलतियाँ सभी से होती हैं, पर संगठन की संस्कृति यही रही है कि कोई गिरे नहीं—और किसी को गिरने न दिया जाए।
संगठनात्मक उपलब्धियाँ और क्षेत्रीय योगदान
संतोष नयन बरनवाल, राष्ट्रीय पदाधिकारी (गोरखपुर), के नेतृत्व में आयोजित वार्षिक अधिवेशन संगठन के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। इस अधिवेशन ने संगठन की पहचान, क्षमता और विस्तार को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया तथा देशव्यापी संरचना को और मजबूत किया।
पूर्व में प्रदेश अध्यक्ष एवं वर्तमान में प्रवक्ता के रूप में कार्य कर रहे ए. बी. सिंह (इंद्र बहादुर सिंह) ने विभिन्न माध्यमों के जरिए संगठन की आवाज को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया और जनसंपर्क को नई दिशा दी।
कंचन सिंह एवं चौरसिया जी ने बलिया जनपद और पूर्वांचल क्षेत्र में संगठन को स्थापित करने हेतु निरंतर प्रयास किए, जिनके सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।
वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष एवं स्वास्थ्य कर्म से प्रवक्ता पद की जिम्मेदारी निभा रहे विनोद कुमार सिंह का त्याग संगठन के लिए प्रेरणास्रोत है। जब-जब संगठन को आवश्यकता पड़ी, वे तन, मन और धन से उपस्थित रहे। संगठन उनके इस निःस्वार्थ योगदान को सदैव स्मरण रखेगा और आशा करता है कि वे आंतरिक कमियों को दूर करते हुए संगठन को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में अग्रणी भूमिका निभाते रहेंगे।
अशोक चौहान का योगदान भी उल्लेखनीय है, जिन्होंने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। वहीं, एक ऐसे वरिष्ठ पदाधिकारी—जिनका नाम संगठन को स्थापित करने की प्रक्रिया से गहराई से जुड़ा है—का प्रभाव संगठन पर सकारात्मक रूप से परिलक्षित हो रहा है। आशा है कि यह “खरा सोना” भविष्य में भी अपनी 24 कैरेट की चमक बनाए रखेगा।
पिंटू सिंह, वरिष्ठ पदाधिकारी के रूप में, बलिया, मऊ और आजमगढ़ जैसे जिलों में संगठन को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का कार्य निरंतर कर रहे हैं, जो संगठन की जमीनी मजबूती को दर्शाता है।
आगे की राह और अपेक्षाएँ
इसके अतिरिक्त भी अनेक राष्ट्रीय एवं प्रदेश पदाधिकारी हैं, जिनका योगदान अत्यंत सराहनीय है। इस आलेख की सीमाओं के कारण उनका विस्तृत अवलोकन अगले चरण में प्रस्तुत किया जाएगा। यह लेख वार्षिक अधिवेशन से पूर्व संगठन की विश्वसनीयता, आत्ममंथन और भविष्य की दिशा तय करने का एक प्रयास है।
राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत अपने सभी पदाधिकारियों और सदस्यों से यह अपेक्षा करता है कि वे संगठन, सहयोगियों और पत्रकारिता के मूल्यों के प्रति सदैव प्रतिबद्ध, सक्रिय और कर्तव्यनिष्ठ बने रहें। संगठन तभी मजबूत होगा जब आत्मालोचना के साथ-साथ सामूहिक उत्तरदायित्व को भी हम समान रूप से स्वीकार करें।
आपका अपना
राष्ट्रीय पर्यवेक्षक
डॉ. देवेंद्र सिंह बघेल

