“अमित उत्सव: यादों, संगीत और संकल्प से भरा एक अनोखा जन्मोत्सव”
एंटी-करप्शन मीडिया अजय कुमार उपाध्याय
कहते हैं—जोड़ियां ऊपर से तय होकर आती हैं। लेकिन कभी-कभी इस धरती पर बनी जोड़ियां भी ऐसी छाप छोड़ जाती हैं, जिन्हें समय भी मिटा नहीं पाता। संगीत जगत की सुरीली दुनिया में अजंता सरकार और अमित जी की जोड़ी भी ऐसी ही एक अनुपम जोड़ी रही है—समर्पण, प्रेम, कला और भावनाओं की अद्भुत संगति से भरी हुई।
अजंता सरकार स्वयं एक प्रतिष्ठित कलाकार हैं, जिन्हें पद्मश्री अनूप जलोटा जी का विशेष स्नेह और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। रविंद्र संगीत की साधना में उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई, और इसका बड़ा श्रेय उनका साथ निभाने वाले अमित जी को भी जाता है। दोनों ने मिलकर संगीत को केवल सुरों का मेल नहीं, बल्कि जीवन का उत्सव बनाया। परंतु जीवन का नियम है—कितना भी लंबा सफर हो, अंततः हर व्यक्ति को संसार छोड़ना ही पड़ता है। अमित जी भी अजंता सरकार का हाथ थामे हुए इस दुनिया से विदा हो गए, लेकिन वे अपने पीछे ऐसा व्यक्तित्व, ऐसे कार्य और ऐसी स्मृतियाँ छोड़ गए, जो हर पल जीवित रहेंगी।
इस पीड़ा को शब्दों में बांधना आसान नहीं। किसी साथी का चला जाना जीवन का सबसे बड़ा खालीपन होता है। लेकिन जब दर्द को शक्ति में बदला जाए—तो वही स्मृति श्रद्धांजलि बन जाती है। अजंता सरकार ने भी यही किया। रोने-धोने के रास्ते को छोड़कर उन्होंने अमित जी की जन्मतिथि को शोक का अवसर नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा का अवसर बनाया। उन्होंने अमित जी के जन्मदिन को “अमित उत्सव” नाम देकर एक अनोखी मिसाल पेश की।
इस उत्सव में विविध कलाकारों, संगीतकारों और साहित्यकारों ने मंच साझा किया। हर किसी ने अमित जी को अपने-अपने तरीके से श्रद्धांजलि अर्पित की। स्वयं उनके गुरु और देश के सुप्रसिद्ध भजन गायक पद्मश्री अनूप जलोटा जी की उपस्थिति इस आयोजन का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व बढ़ा गई। इसके अलावा कई प्रतिष्ठित विद्वानों, प्रख्यात कलाकारों और सम्मानित गणमान्य अतिथियों ने भी अमित जी की स्मृति को प्रणाम करते हुए उनकी कला-निष्ठा और सरल व्यक्तित्व को याद किया।
अजंता सरकार का यह कदम इस बात का संदेश देता है कि—
“विरह को भी शक्ति में बदला जा सकता है, स्मृतियों को भी उत्सव बनाया जा सकता है।”
उन्होंने समाज को यह दिखाया कि किसी प्रियजन की कमी को लगातार रोकर नहीं, बल्कि उनके अच्छे कार्यों को जीवित रखकर पूरा किया जा सकता है। अमित जी का जीवन संगीत, सौम्यता, मित्रता और सकारात्मकता से परिपूर्ण था। “अमित उत्सव” इन मूल्यों को आगे बढ़ाने का वादा भी है और उनकी विरासत को संरक्षित करने का संकल्प भी।
यह उत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक भावनात्मक यात्रा था—अतीत की स्मृतियों से वर्तमान की शक्ति तक, दर्द से प्रेरणा तक, और प्रेम से समर्पण तक।
अजंता सरकार ने जो निर्णय लिया, वह केवल व्यक्तिगत श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि समाज के लिए एक संदेश है—
“हमेशा अच्छाई को याद करें, अच्छे कार्यों को आगे बढ़ाएँ, और जीवन को सकारात्मकता से जीना न भूलें।”
“अमित उत्सव” न केवल अमित जी के प्रति प्रेम की अभिव्यक्ति है, बल्कि संगीत और मानवता के प्रति उनके योगदान का उत्सव भी है। ऐसा उत्सव जो आगे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर रहेगा।

