ये वो औरत है जो छह महीने तक रानी बनकर रही
जून 2025 का एक गर्म दोपहर था।
छत्रपति संभाजीनगर की जालना रोड पर स्थित पांच सितारा होटल एम्बेसडर अजंता के गेट पर एक मर्सीडीज़ रुकी। कार से उतरी एक 45 साल की औरत, साड़ी में लिपटी, माथे पर बड़ी-सी बिंदी, हाथ में सरकारी फाइलों वाला बैग। उसने रिसेप्शनिस्ट को एक नजर देखा और शांत, ठंडी आवाज में कहा,”रूम तैयार है न? मैं कल्पना भागवत, IAS। UPSC 2017, रैंक 333। ट्रेनिंग के बाद महाराष्ट्र कैडर मिला है।”
रिसेप्शनिस्ट ने फटाक से सैल्यूट ठोका।
मैनेजर दौड़ा चला आया। उस दिन से शुरू हुआ एक अजीबोगरीब नाटक जो छह महीने तक चला।
हर सुबह 10 बजे कल्पना मैडम कमरे से निकलतीं। होटल का स्टाफ “गुड मॉर्निंग मैडम” बोलता हुआ लाइन से खड़ा हो जाता। वो लॉबी में बैठकर कॉफ़ी पीतीं, फोन पर “दिल्ली से लाइन है”, “मिनिस्ट्री में मीटिंग है” कहतीं। शाम को स्विमिंग पूल के किनारे चहलकदमी करतीं, रात को रेस्टोरेंट में सबसे महंगी वाइन मंगवातीं। बिल? “अरे, सरकारी बिल है। बाद में क्लियर हो जाएगा।
“होटल वाले डरते भी थे और खुश भी। एक IAS मैडम खुद उनके होटल में ठहरी है ये तो प्रचार का मौका है। 40-50 लाख का बिल जमा होता गया। किसी ने पूछने की हिम्मत नहीं की।
फिर आया 23 नवंबर 2025।
शहर में कोई बड़ा VIP आने वाला था। पुलिस होटलों की चेकिंग कर रही थी।
सिडको थाने का एक सब-इंस्पेक्टर रूटीन में एम्बेसडर अजंता पहुंचा।
उसने मैडम से आधार कार्ड मांगा।
कल्पना ने एक आधार कार्ड निकाला — उस पर फोटो तो उनका था, पर नंबर के ऊपर कुछ और लिखा हुआ था।
इंस्पेक्टर ने शक किया। कमरे की तलाशी ली।
और वहां खुला पंडोरा बॉक्स।
पांच पन्नों का फर्जी IAS नियुक्ति पत्र।
UPSC 2017 की जाली रैंक लिस्ट — जिसमें टॉपर टीना डाबी के नीचे तीसरे नंबर पर लिखा था: कल्पना त्रिंबकराव भागवत। एक सर्टिफिकेट — पुणे यूनिवर्सिटी की तरफ से “बेस्ट IAS ऑफिसर अवार्ड”। और सबसे खतरनाक दो मोबाइल फोन।
पहला फोन खोला तो स्क्रीन पर व्हाट्सऐप चैट्स:”अशरफ भाई, पैसा भेज दो, होटल वाला तंग कर रहा है।”
अशरफ का नंबर अफगानिस्तान का।
दूसरी चैट “भाई जान, इस्लामाबाद से बोल रहा हूं। अगला बैच कब भेजना है?”
गैलरी खोली तो दिल दहल गया।
सैकड़ों पासपोर्ट की फोटोज उज्बेक, ताजिक, अफगान, बांग्लादेशी।
वीजा स्टिकर्स, एंट्री-एग्जिट स्टैम्प्स।
एक फोल्डर का नाम था “Delhi_RedFort_2025″।
पुलिस ने जब बैंक डिटेल्स चेक कीं तो पता चला जनवरी से नवंबर तक 32 लाख से ज्यादा पैसे आए थे। कई बार फोनपे से, कई बार हवाला से। एक दिन में 2.31 लाख अशरफ खिल नाम के अफगान ने भेजे थे।
अगले तीन दिन में कहानी ने ऐसा करवट लिया कि पूरा महाराष्ट्र हिल गया।
26 नवंबर को केस महाराष्ट्र ATS के पास गया। 27 नवंबर को दिल्ली से IB के दो अफसर aurangabad पहुंचे।
28 नवंबर को दिल्ली से अभिषेक चौधरी नाम का एक और शख्स पकड़ा गया — जो खुद को गृह मंत्रालय का OSD बताता था। 29 नवंबर को पुणे से दो और लोग गिरफ्तार जिनमें एक अफगान नागरिक था।
कल्पना अब पुलिस कस्टडी में है।
वो चुप है।
जब पूछा जाता है कि पैसा कहां से आया, तो बस एक बात कहती है मैं तो बस अच्छी जिंदगी जीना चाहती थी।”
लेकिन अब सवाल ये नहीं कि उसने छह महीने फ्री में पांच सितारा होटल में कैसे गुजारे।
सवाल ये है वो सैकड़ों पासपोर्ट की फोटोज किसके लिए इकट्ठा कर रही थी? वो पैसा जो अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आ रहा था, किसका था?
और सबसे बड़ा सवाल, 2025 में दिल्ली के लाल किले के बाहर जो कार धमाका हुआ था, उस दिन कल्पना दिल्ली में थी या नहीं?
– साभार
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