कोझिकोड। एक बस यात्रा, एक वीडियो और इंटरनेट मीडिया पर मिनटों में चली सुनवाई, केरल के कोझिकोड में यही घटनाक्रम एक युवक की जान ले बैठा। महिला द्वारा छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए इंटरनेट मीडिया पर डाले गए वीडियो के वायरल होते ही दीपक की जिंदगी जैसे सार्वजनिक चौक पर टांग दी गई।
आरोपों की सत्यता पर कोई आधिकारिक जांच शुरू होती, उससे पहले ही इंटरनेट मीडिया ने उसे दोषी ठहरा दिया और इसी ‘डिजिटल किरकिरी’ के दबाव में दीपक ने आत्महत्या कर ली।
एक युवती ने गोविंदपुरम निवासी दीपक पर बस यात्रा के दौरान छेड़छाड़ का आरोप लगाया था और उसका वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से फैल गया।
वीडियो वायरल होते ही दीपक की तस्वीर एक आरोपित के तौर पर हर प्लेटफार्म पर घूमने लगी। परिवार और मित्रों का कहना है कि लगातार हो रही ऑनलाइन बदनामी, तानों और सवालों ने उसे भीतर से तोड़ दिया था।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब गोवा के पूर्व राज्यपाल और वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस श्रीधरन पिल्लई पीडि़त परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने पुलिस की शुरुआती भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि वायरल वीडियो और आत्महत्या के बीच सीधा संबंध होते हुए भी पुलिस ने पहले इसे केवल अप्राकृतिक मृत्यु बताकर मामला हल्का कर दिया। उनके अनुसार, यह स्पष्ट रूप से आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला बनता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
परिजनों के दबाव और बढ़ते आक्रोश के बाद पुलिस ने दीपक की मां की शिकायत पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है।
आरोप लगाने वाली महिला फिलहाल फरार बताई जा रही है, जिसकी तलाश तेज कर दी गई है। जिस मोबाइल फोन से वीडियो बनाया गया था, उसकी बरामदगी के प्रयास जारी हैं और इंटरनेट मीडिया से हटाए गए डेटा को खंगालने के लिए साइबर पुलिस को भी जांच में शामिल किया गया है।
#Kerala

