*अनोखी मान्यता: लेहड़ा मंदिर में आंचल पर नृत्य कराने पर भर जाती है सूनी गोद*
*महराजगंज*:- नवरात्रि में देवी के नौ रूप की पूजा होती है। अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए आस लेकर लोग हर उस जगह पहुंचते हैं जहां उन्हें उम्मीद दिखाई देती है। पूर्वांचल में प्रसिद्ध लेहड़ा मंदिर में दूर-दूर से लोग दर्शन करने आए हैं। इसमें से कई लोगों की मुराद पुरी भी हो जाती है। इस मंदिर से जुड़ी एक अनोखी मान्यता यह भी है कि यहां आंचल पर नृत्य कराने से देवी उन महिलाओं पर प्रसन्न हो जाती हैं जिनकी गोद में किलकारी नहीं गूंजी है। आंचल पर नृत्य करने के बाद महिलाओं की आस के मुताबिक उनकी गोद भर जाती है। हर दम्पत्ति का सपना होता है कि उनके आंगन में भी एक फूल खिले, लेकिन कई लोगों का यह सपना पूरा नहीं हो पाता है। मान्यता है कि बृजमनगंज क्षेत्र के अदरौना लेहड़ा देवी के दर्शन के बाद आंचल पर नृत्य करने से यह मुराद पूरी हो जाती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि नवरात्र के अष्टमी नवमी के दिन लेहड़ा देवी के दरबार में पचरा गीत पर आंचल पर नृत्य करवाने से महिलाओं की सूनी कोख भर जाती है। इसी महिमा के चलते महानवमी के दिन यहां विशाल मेला का भी आयोजन होता है। मंदिर परिसर में कई महिलाएं अपनी आंचल को बिछा देती हैं। नृत्यांगनाएं महिलाओं के आंचल पर नृत्य करती हैं। इस दौरान महिलाएं हाथ जोड़ विशेष पूजा करती हैं। नृत्य के बाद नर्तकियों को भी पारितोषिक दिया जाता है। मंदिर के पुजारी का कहना है कि आस्था सभी पर भारी रहती है। सभी लोग अपनी मनोकामना लेकर मां के दरबार में हाजिरी लगाने आते हैं। अपने-अपने हिसाब से पूजा-अर्चन करते हैं। लोगों की मान्यताएं पूरी होती रहती हैं।

