“जब जज ने 20 साल की सजा सुनाने के लिए हथौड़ा उठाया ही था, तभी अदालत का दरवाजा खुला और एक सफाई कर्मचारी ने कचरे का काला बैग मेज पर पटकते हुए चिल्लाकर कहा—’योर ऑनर, इस कचरे के भीतर उस रईस औरत का वो राज छिपा है जो एक मासूम की जिंदगी तबाह कर देगा’।”
‘राजीव’ (Rajiv) 19 साल का एक वर्किंग स्टूडेंट है। वह अपनी बीमार माँ की मदद करने के लिए एक फाइव-स्टार होटल में वेटर का काम करता है।
एक रात, उसने ‘मिसेज सिंघानिया’ (Mrs. Singhania) की प्राइवेट पार्टी में सेवा की, जो एक अमीर और घमंडी महिला थीं। पार्टी के बाद, सिंघानिया ने हंगामा खड़ा कर दिया। उन्होंने दावा किया कि उनकी 20 मिलियन रुपये (2 करोड़) की 50-कैरेट की हीरे की अंगूठी गायब है।
चूंकि राजीव सफाई करने के लिए वीआईपी रूम में जाने वाला आखिरी व्यक्ति था, इसलिए उस पर उंगली उठाई गई। हालांकि उसके पास से कुछ नहीं मिला, लेकिन मिसेज सिंघानिया ने अपने पैसे और रसूख का इस्तेमाल कर राजीव को फंसा दिया। उन्होंने झूठे गवाह खड़े किए जिन्होंने शपथ लेकर कहा कि उन्होंने राजीव को अंगूठी एक टिश्यू पेपर में लपेटते देखा था।
आज फैसले का दिन है। अदालत भरी हुई है। 200 लोग देख रहे हैं—पत्रकार, राजीव का रोता हुआ परिवार, और मिसेज सिंघानिया का खेमा जो जीत की मुस्कान लिए बैठा है।
“राजीव शर्मा,” न्यायाधीश (Judge) ने गंभीर चेहरे के साथ कहा। “गवाहों के पुख्ता सबूतों और तुम्हारे पास कोई ठोस दलील न होने के कारण…”
राजीव की माँ फूट-फूट कर रोने लगीं। “नहीं! मेरा बेटा चोर नहीं है!”
राजीव ने सिर झुका लिया। उसने हार मान ली थी। अमीरों के सामने उनकी कोई बिसात नहीं थी।
न्यायाधीश ने अपना हथौड़ा (Gavel) उठाया।
“मैं तुम्हें 20 साल के कारावा—”
धड़ाम!
अदालत का दरवाजा जोर से खुला।
“एक मिनट रुकिए, योर ऑनर!”
सबकी गर्दनें मुड़ गईं।
एक बूढ़ा व्यक्ति सफाई कर्मचारी (Janitor) की वर्दी में अंदर दाखिल हुआ। उसके हाथ में झाड़ू, डस्टपैन और एक काला कचरे का थैला (Trash bag) था। वह ‘चाचा रामू’ थे, जो कोर्ट हाउस के सफाई कर्मचारी थे।
“तुम कौन हो?!”
न्यायाधीश ने गुस्से में पूछा।
“फैसले के बीच में खलल क्यों डाल रहे हो?!”
“हुजूर, मैं यहाँ का सफाई कर्मचारी हूँ,”
रामू ने हांफते हुए कहा।
“लेकिन इस लड़के को जेल भेजने से पहले…….
आपको इस कचरे के थैले के अंदर की सच्चाई देखनी होगी।”
“क्या तुम पागल हो गए हो?!”
मिसेज सिंघानिया अपनी कुर्सी से चिल्लाते हुए उठीं।
“एक सफाई कर्मचारी को न्याय रोकने का क्या हक है?!
जज साहब, इसे बाहर निकालिए!
कितनी बदबू आ रही है!”
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