संयुक्त परिवार में मर्यादा से रहना पड़ता है।
इसीलिए बहुएं चूल्हे बांटती हैं या पति को लेकर अकेले रहने लगती हैं…
पति काम पर और फिर मटरगस्ती शुरू……
कौन है साला रोकने-टोकने वाला
बहू का जानने वाला ससुराल में कौन आ रहा है??
किसलिए और किस काम से आया है ??
जो आया है वो घर के बड़े बुजुर्गो के साथ ही बैठेगा..!!
पढ़ें लिखे सभ्य सदस्यों वाली ससुराल में उल्टे सीधे कपड़े पहन नहीं सकती…
गैर मर्दों के साथ खिल खिलाकर, बुक्का फाड़कर हंस बोल नहीं सकती…
द्विअर्थी संवादों में मजाक नहीं कर सकती…
वक्त, बेवक्त और देर रात तक कहीं मटरगस्ती नहीं कर सकती हैं..!!
इन्हीं सब कारणों से कुछ बहुएं पहले चूल्हे बांटती है और रोज किसी ना किसी बात पर झगड़ा शुरू कर देती हैं…
पति भी परेशान और उसके घरवाले भी परेशान।
फिर एक दिन घरवालों को ही कहना पड़ता है कि जब बहू की घर में पटरी नहीं खा रही है तो इसको लेकर अलग रहने लगो और खुश रहो..!!
अब यदि पति, पत्नी का विरोध करता है तो यहीं से शुरू होते हैं झूठे घरेलू हिंसा के मुकदमे,
घर के बड़े बुजुर्गों पर शारीरिक शोषण का झूठा आरोप, मां और पति पर झूठे दहेज उत्पीड़न के मुकदमे..!!
ध्यान रहे कुंवारे लड़कों-
तुम्हें तुम्हारे भाइयों और माता-पिता से दूर करने वाली… हर त्यौहार और छुट्टियों में मायके बनी रहेगी और तुम से ही अपने मां – बाप की सेवा करवाएगी और खुद आजाद जिंदगी जिएगी..!!
कसम खा लो – यदि पत्नी के गलत बर्ताव के कारण मां को वृद्धाश्रम जाना पड़ रहा है तो लानत है आपकी मर्दानगी पर…….
उसे मायके का रास्ता दिखाएं और माता – पिता की उसी तरह सेवा करें जैसे उन्होंने आपके बचपन में आपकी देखभाल करी थी।
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80% मामलों में पत्नी की मां का बहुत बड़ा योगदान होता है… अपनी ही बेटी को उल्टी सीधी सलाहें देकर उसका घर उजाड़ने में….!!

