478 रुपये से सीधा 600 करोड़… 15 मिनट के लिए अरबपति बन गया बक्सर का हलवाई!
बक्सर के सिमरी प्रखंड में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को हैरान कर दिया। बड़का राजपुर गांव के जितेंद्र साह, जो रोज कुआं खोदकर पानी पीने जैसी जिंदगी जीते हैं, अचानक उस वक्त सुर्खियों में आ गए जब उनकी जेब में मौजूद महज 478 रुपये वाली बैंक पासबुक कुछ ही पल में 600 करोड़ रुपये का आंकड़ा दिखाने लगी। रोज की तरह 200 रुपये निकालने पहुंचे जितेंद्र को खुद भरोसा नहीं हुआ कि वही खाता, जिसमें कभी दो अंकों का बैलेंस रहता था, अचानक अरबों में कैसे पहुंच गया।
ग्राहक सेवा केंद्र का ऑपरेटर भी अवाक रह गया। बैलेंस तीन बार चेक हुआ, और हर बार स्क्रीन पर वही चौंकाने वाला आंकड़ा—6 अरब से ज्यादा। पहले गांव वालों को लगा कि कोई मज़ाक है, लेकिन जब मशीन दोबारा वही रकम दिखाती रही तो मामला तुरंत बैंक तक पहुंचा। बैंक ने इसे संदिग्ध समझते ही खाते को फ्रीज किया और घटना की जानकारी थाने और साइबर सेल को भेज दी।
जितेंद्र की आर्थिक हालत बेहद साधारण है—हलवाई की दुकान में हेल्पर, कभी-कभी दिहाड़ी मजदूर। पत्नी की छोटी सी गुमटी, जिस पर दिनभर में सौ–डेढ़ सौ रुपये मुश्किल से आते हैं। घर कच्चा, चूल्हा टूटा, टीन की छत टपकती हुई—ऐसे परिवार के लिए खाते में 600 करोड़ दिखना किसी डरावने सपने जैसा था। जितेंद्र ने खुद कहा, “इतना पैसा देखा नहीं, सोचकर ही डर लगा कि कहीं यह मुसीबत न बन जाए।”
गांव में खबर आग की तरह फैली। कोई इसे ऊपरवाले का खेल बता रहा था, तो कोई साइबर अपराध। भीड़ लगने लगी, अफवाहों ने जोर पकड़ा। इसी बीच जितेंद्र थाने पहुंचा और पूरी बात बताई। पुलिस ने प्राथमिक जांच में इसे तकनीकी गड़बड़ी या बड़े साइबर फ्रॉड का शक बताया। साथ ही यह भी पड़ताल हो रही है कि कहीं किसी गिरोह ने गलत खाते में काले धन की एंट्री तो नहीं की।
करीब 10–15 मिनट के लिए जितेंद्र खाते में अरबों रुपये का मालिक था, लेकिन खाते के फ्रीज होते ही उसकी दुनिया वापस उसी कच्चे घर और दिहाड़ी की अनिश्चितता में लौट आई। अब जांच में क्या निकलता है, इसे लेकर गांव से लेकर जिला मुख्यालय तक चर्चा जोरों पर है।

