स्व.अशरफी लाल की मनाई गई पूण्य तिथि
म्हराजगंज,आज दिनाँक 16-10-2021 को घुघली ब्लाक अंतर्गत स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अशरफी लाल की पुण्यतिथि ग्राम बेलवा टीकर में मनाई गयी। उक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री जनार्दन गुप्ता ने बताया कि लाल लाजपत राय की पंजाब में लाठी चार्ज से मृत्यु होने पर स्वर्गीय लाल के अंदर अंग्रेजों के प्रति घृणा एवं देशभक्ति का संचार हुआ। इसी क्रम में एक कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ। उक्त कार्यक्रम में कुमार देवेश, बैजनाथ यादव, संतोष कुमार श्रीवास्तव, गुंजन श्रीवास्तव और स्वदेश विक्रांत ने काव्य पाठ किया। स्वदेश ने सुनाया “आसान नहीं होता दो बातें कर लेना, अंदर के शोर को जगजाहिर कर देना”, संतोष कुमार श्रीवास्तव ने “एक नेता नए आदमी से मिला, क्या बताए वहां बेहया ही खिला,देखते देखते फूल डरने लगे, और चुनावों का निकला नया सिलसिला” सुनाया। कार्यक्रम के दौरान सुधीर श्रीवास्तव, विद्यासागर राय, देवेंद्र पांडेय, वकील प्रजापति, रासूरत पटेल, राजकुमार श्रीवास्तव, डी डी भारती, अनिल सिंह, डॉ संजय श्रीवास्तव, संजय मणि, चारू चंद्र श्रीवास्तव, दिनेश जैसवाल, दयानंद, आनंद पटेल, मनीष श्रीवास्तव, मनीष कुमार, हेमंत किशोर श्रीवास्तव,मनोरमा देवी, किरन, पूनम, संयम, संदेश आदि उपस्थित रहें। गोरखपुर मंडल के जनपद महाराजगंज के घुघली थाना के अंतर्गत ग्राम बेलवां टीकर में पैदा हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अशर्फी लाल श्रीवास्तव , महाराजगंज के जूनियर हाई स्कूल में पढ़ते हुए महात्मा गांधी के भाषण और प्रधानाचार्य पौहारी लाल के सानिध्य में मिले देशप्रेम की भावनाओं से प्रेरित हो स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हो गए और जनपद बस्ती को अपना कार्य क्षेत्र बनाया तथा कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण किये, बाद में समाजवादी नेताओ जय प्रकाश नारायण, आचार्य नरेंद्र देव, राम मनोहर लोहिया से प्रभावित हो समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए | आज़ादी के दौरान पंडित राजाराम शर्मा के साथ मिल कर विजय नाम का अख़बार भी निकाला | प्रोफेसर सिब्बन लाल सक्सेना के तमाम आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभायी| आज़ादी के बाद राजनीति से धीरे धीरे मोह भंग होने लगा किन्तु राजनीति और समाज में सामंजस्य स्थापित रखते हुए देश सेवा में लगे रहे | ग्राम विशुनपूर गबड़ुवा में शहीद स्मारक की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान रहा| 16 अक्टूबर 1999 को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में देहावसान हो गया| ग्राम बेलवां टीकर में क्षेत्रीय नागरिकों , ग्रामवासियो , सुभचिंताको एवं परिवार के सदस्यों के द्वारा आप के मूर्ति की स्थापना हुई जहाँ पर प्रतिवर्ष उन्हें याद करते हुए सादर श्रद्धांजलि अर्पित किया जाता है |
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान किये कार्यो एवं अपने जीवन से सम्बंधित बातों को अपनी आत्मकथा के रूप में “संस्मरण” नामक पुस्तिका में लिखा है | जिसे उन्होंने अपनी अर्धांगिनी एवं जीवन की सहयात्री स्वर्गीय जमुनोत्री देवी को समर्पित किया है | पूज्यनीय जमुनोत्री देवी प्राथमिक स्कूल बेलवां टीकर की प्रधानाध्यापिका रही और स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान किया |

