चिरैनापुर में ग्रामसभा में बह रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान की रसधार,स्रोता लगा रहे ज्ञान गंगा में डुबकी
महराजगंज, सदर तहसील बल्लो खास का टोला चिरैनापुर में श्रीमद्भागवत महापुराण संगीतोब्द्ध कथा का श्रवण कराया जा रहा हैं।जहां श्रद्धालु एकत्रित होकर कथा का आनन्द उठा रहे है।आचार्य पण्डित हरिकेश शुक्ल व्यास जी के द्वारा जीवन चक्र से जुड़े प्राणियो को वास्तविक पहचान वेदव्यास की वाणी में कराया जा रहा है। आयोजन कथा परीक्षित श्री पारस नाथ मिश्र व उनकी पत्नी रामआरती देवी के कर कमलों द्वारा किया गया है।जिसमे रामबचन व दिनेश शर्मा जी के संगीतमयी ध्वनियो से वातावरण भक्तिमय हो गया है।
आचार्य जी ने कहा कि सनातन धर्म के 18 पवित्र पुराण हैं, जिनमें एक भागवत् पुराण भी है। इसे श्रीमद्भागवत या केवल भागवतम् भी कहते हैं। यह जगत के पालक श्रीविष्णुजी के धरती पर लिए गए 24 अवतारों के साथ उस दौरान उनके जीवन की कथा का भावपूर्ण वर्णन है। 12 खंडों के इस ग्रंथ में 335 अध्याय तथा 18 हजार श्लोक हैं। इसके 10वें अध्याय में श्रीकृष्ण का जीवन सार कुछ इस प्रकार वर्णित है क यह समस्त प्राणियों के लिए सांसारिक जीवन जीते हुए ज्ञान तथा मुक्ति का मार्ग दिखाता है।श्रीमद्भागवत कथा सुनना और सुनाना दोनों ही मुक्तिदायिनी है तथा आत्मा को मुक्ति का मार्ग दिखाती है। भागवत पुराण को मुक्ति ग्रंथ कहा गया है, इसलिए अपने पितरों की शांति के लिए इसे हर किसी को आयोजित कराना चाहिए। इसके अलावा रोग-शोक, पारिवारिक अशांति दूर करने, आर्थिक समृद्धि तथा खुशहाली के लिए इसका आयोजन किया जाता है।
श्रीमद्भागवत महापुराण का श्रवण करना बहुत बड़ी बात है। भागवत कथा का जो श्रवण करता या करवाता है उसे सात जन्मों के पुण्य की प्राप्ति होती है। पौधा लगाने पर वह धीरे-धीरे वृक्ष बनता है। इसके बाद फल देना शुरू करता है। ठीक इसी तरह भागवत कथा श्रवण से ही भाग्य, पुण्य एकत्रित होता है। कई जन्मों के पुण्य के प्रभाव से ही भागवत कथा श्रवण करने का लाभ मिलता है।इसी कथा में नारद जी के जन्मो में सनकादि,पृथु,वराह,यज्ञ (सुयज्ञ),कपिल,दत्तात्रेय,नर-नारायण,ऋषभदेव,हयग्रीव,मत्स्य,कूर्म,मोहिनी,ध्वन्तरि,गजेन्द्र-मोक्षदाता,नरसिंह,वामन,हंस,परशुराम,राम,वेदव्यास,नारद,कृष्ण,वेंकटेश्वर ,कल्कि अवतरो का भी बर्णन किया।
आचार्य जी ने कहा कि जैसे सूर्य का उदय होता है तो अंधकार चला जाता है, उसी तरह भागवत कथा श्रवण से व सत्संग से अज्ञानता खत्म हो जाती है। उन्होंने कहा कि सुख-दुख दोनों में भगवान का स्मरण करना चाहिए। लेकिन, जब सुख आता है तो लोग भगवान को भूल जाते हैं, और जैसे ही दुख आता है तो लोग भगवान को याद करने लगते हैं। भगवान कहते है कि जीवन को सही दिशा में और सही ढंग से जीना है तो सुख-दुख दोनों में हमें याद करें।इस कथा में यतीन्द्र कुमार मिश्र,अवनींद्र कुमार मिश्र (adv),पीयूष मिश्र,राघव शरण मिश्र,शम्भू शरण मिश्र व ग्रामवासी कथा में विह्वल हो गए।

