फर्टिलाइजर के कारण अब मिलेगी बेरोजगारों को रोजी,होंगे गोरखुर का विकास
महराजगंज,प्रदेश के किसानों की उन्नति की इबारत लिखने वाला एचयूआरएल कारखाना गोरखपुर जनपद वासियों के लिए रोजगार के अवसर भी लेकर आया है। कारखाने के अधिकारियों के मुताबिक कामगार, माल भाड़ा, यात्री सुविधा, आवास, खानपान आदि क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। कारखाने में प्रत्यक्ष रूप से 380 लोगों को रोजगार मिला है जबकि इसके कारण अप्रत्यक्ष रूप से करीब बीस हजार लोगों की रोजी रोटी चलेगी।
शहरी यातायात में 25 फीसदी रोजगार सृजित होंगे
गोरक्ष पूर्वांचल ऑटो ऑपरेटर यूनियन के अध्यक्ष जेके द्विवेदी ने बताया कि शहरी यातायात व्यवस्था में ऑटो, तीन पहिया वाहनों की 70 फीसदी भागीदारी है। खाद कारखाना खुलने से एक नए रूट पर आवाजाही बढ़ेगी। मेरा अनुमान है कि अगले एक वर्ष में शहर के ऑटो, तिपहिया वाहन चालकों की कमाई में 25 फीसदी तक बढ़ोतरी होगी। नए रूट के लिए नए ऑटो भी लगाने पड़ेंगे, इसका अर्थ हुआ कि कुछ और युवाओं को इस रूट पर रोजगार के अवसर मिलेंगे। नए ऑटो भी खरीदे जाएंगे जिससे ऑटो निर्माता कंपनियों की बिक्री भी बढ़ेगी। इसके साथ ही ऑटो से जुड़े सर्विस, पंचर, मरम्मत आदि क्षेत्र में युवाओं को रोजगार मिलेगा।
गुड्स ट्रांसपोर्ट सेक्टर को भी फायदा
गोरखपुर गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मनीष सिंह ने बताया कि गोरखपुर में अभी तक दूसरे जिलों से माल आता था, यानी यहां माल लाने वाले ट्रकों को खाली वापस होना पड़ता था। खाद कारखाना खुलने से अब इन ट्रकों को वापसी माल भाड़ा मिलने की उम्मीद है। कारखाना खुला है तो उसे भी कच्चा माल, मशीनों के पुर्जे, स्टेशनरी, मशीनें आदि की भी जरूरत पड़ेगी। स्थानीय ट्रांसपोर्टरों को भी जनपद और आसपास के जिलों तक खाद की आपूर्ति करने में भागीदारी मिलेगी। निश्चय ही इससे ट्रांसपोर्ट सेक्टर को बहुत फायदा होगा। खाद कारखाने के शुरू होने से हर क्षेत्र में आर्थिक उन्नति के रास्ते खुल गए।
होटल सेक्टर को भी मिलेगा लाभ
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के पदाधिकारी अचिंत्य लाहिड़ी ने बताया कि फूडिंग एंड लॉजिंग इंडस्ट्री का विकास किसी भी क्षेत्र के विकास से सीधा जुड़ा होता है। खाद कारखाना खुलने से होटल एंड अकोमोडेशन सेक्टर को भी लाभ मिलेगा। खाद कारखाना खुलने से खाद या खाद निर्माण के दौरान बाइप्रोडक्ट से जुड़े कारोबारियों का आना जाना बढ़ेगा। कारखाने का अध्ययन करने देशी-विदेशी शोधार्थी, कारखाने का निरीक्षण करने के लिए अधिकारी आदि का आना-जाना भी शुरू होगा। इन आगंतुकों के रहने खाने की सुविधा जनपद के होटलों को ही देनी होगी।
अनुपूरक उद्योगों का होगा विकास
व्यापारी नेता मणिनाथ गुप्ता ने बताया कि खाद कारखाना खुलने से इससे जुड़ी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनुपूरक उद्योगों का विकास होगा। कारखाने से उत्पाद के अलावा उप उत्पाद से जुड़े कारोबार कारखाने के आसपास ही विकसित होने लगते हैं। यदि बड़े और केंद्रीयकृत व्यवस्था के आधार पर आपूर्ति किए जाने वाले कच्चे माल को छोड़ दिया जाए तो भी कारखाने के कर्मचारियों के खाने पीने, स्वच्छता, सफाई, आदि सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही लेनी पड़ेंगी। इसका अर्थ है कि स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा।
कारखाने के आसपास होगा विकास
कारोबारी नितिन कुमार जायसवाल ने बताया कि कोई भी कारखाना बनता है तो उसके आसपास बस्ती बसने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। कारखाने के आसपास चाय-पान, रोजमर्रा की जरूरतों की दुकानें खुलने लगीं हैं। कारखाने में काम करने वाले अधिकतर कर्मचारी दूसरे जनपदों के रहने वाले हैं। ऐसे में ये कर्मचारी कारखाने के पास ही रहने की सुविधा चाहते हैं। इसका फायदा आसपास रहने वाले लोगों को होगा, यानी वहां रहने वाले लोगों के पास मकान या कमरा किराए पर देकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं।
अप्रत्यक्ष रूप से बीस हजार को मिलेगा लाभ
गोरखपुर खाद कारखाना एचयूआरएल के वरिष्ठ प्रबंधक सुबोध दीक्षित ने बताया कि खाद कारखाने में 380 कर्मचारी परमानेंट हैं। इसके अलावा कारखाने में सिक्योरिटी गार्ड, माली, रसोइया, फिटर, एसी मैकेनिक, कारपेंटर, मैकेनिक आदि पदों पर अस्थायी या संविदा के आधार पर रोजगार सृजन होगा। कारखाने से अप्रत्यक्ष रूप से जिले और आसपास के क्षेत्रों में करीब बीस हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।
प्लास्टिक बोरी इंडस्ट्री की उन्नति की उम्मीद
श्रीकृष्णा पॉलीफैब के एमडी भोला जायसवाल ने बताया कि खाद कारखाना में रोजाना 85,555 बोरी नीम कोटेड यूरिया का उत्पादन होगा। इसकी पैकिंग के लिए प्रत्येक माह करीब 30 लाख हाई डेंसिटी पॉलिथीन (एचडीपी) प्लास्टिक बोरियों की आवश्यकता होगी। जनपद में ऐसी बोरियां प्रियंवदा इंडस्ट्री, एवीआर पेट्रो, माडर्न लेमिनेटर्स और श्रीकृष्णा पॉलीफैब प्राइवेट लिमिटेड बनाती हैं। इन फैक्ट्रियों को बोरियां आपूर्ति का ऑर्डर मिलने से इनसे जुड़े कर्मचारियों का आर्थिक विकास होना तय है। हालांकि अभी तक खाद कारखाना की ओर से इन फैक्ट्रियों को अनुपूरक फैक्ट्री घोषित नहीं किया गया है।

