#आजमगढ़ शंभूपुर ट्रिपल #हत्याकांड : अनाथ हुईं दोनों बच्चियों को #एसएसपी ने लिया गोद, एसएसपी देंगे एक माह का वेतन – #पुलिसकर्मी देंगे एक दिन का वेतन………..आजमगढ़ #अहरौला शम्भूपुर हत्याकांड में अनाथ हुई दोनों मासूम बच्चियों के लिए आजमगढ़ पुलिस परिवार माता-पिता बनकर सामने आया है। एसएसपी आजमगढ़ ने एक माह का वेतन और जनपद के सभी पुलिसकर्मियों ने एक-एक दिन का वेतन दोनों बच्चियों के पालन-पोषण और शिक्षा के लिए देने का फैसला किया है। अब ये बच्चियां अकेली नहीं हैं।
सात घंटे तक पिता से बच्चों की जिंदगी की भीख मांगती रही पुलिस, नहीं पसीजा अरविंद
शम्भूपुर में तीन लोगों की हत्या के बाद अरविंद अपने तीन बच्चों और लाइसेंसी रिवाल्वर के साथ कमरे में बंद हो गया था। पुलिस और परिजन करीब सात घंटे तक उसे समझाते रहे तथा बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने की अपील करते रहे, लेकिन उसने बच्चों को बाहर नहीं आने दिया। इसी दौरान वह लगातार बच्चों को गोली मारने की धमकी भी दे रहा था।
गोली की आवाज सुनते ही पुलिस ने जान जोखिम में डालकर तोड़ा दरवाजा
देर रात कमरे के भीतर से गोली चलने की आवाज आने पर बच्चों की जान पर तत्काल खतरा देखते हुए एसएसपी आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह एवं आरक्षी प्रदीप ने जान जोखिम में डालकर दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया। कमरे में नौ वर्षीय शौर्य गोली लगने से गंभीर रूप से घायल मिला। पुलिस टीम उसे तत्काल अस्पताल ले गई, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
बेटे शौर्य को खुद मारी गोली, परी बनी गवाह
पुलिस द्वारा सकुशल रेस्क्यू की गई 11 वर्षीय परी ने बताया कि उसके पिता अरविंद ने ही उसके भाई शौर्य को गोली मारी थी। परी घटनाक्रम के दौरान कमरे में मौजूद थी और उसने पूरी घटना देखी। उसने बताया कि अरविंद बच्चों को जान से मारने की धमकी दे रहा था। पुलिस टीम ने परी एवं छह माह की बच्ची को सकुशल बाहर निकाला। परी की कोहनी के पास मामूली खरोंच आई है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा – शौर्य की मौत पुलिस की गोली से नहीं
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शौर्य को पुलिस की गोली नहीं लगी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और साक्ष्य पुलिस के पक्ष से मेल खाते हैं।
1. गोली लगने की दूरी से संबंधित तथ्य – बच्चे के एंट्री वुंड पर ब्लैकनिंग, टैटूइंग एवं स्कॉर्चिंग के चिह्न मिले हैं, जो बहुत नजदीकी दूरी से गोली चलने पर होते हैं। घटनास्थल पर पुलिस टीम और बच्चे के बीच दूरी 8-10 फीट थी। इस दूरी से ऐसे चिह्न संभव नहीं हैं।
2. गोली की ट्रैजेक्टरी से संबंधित तथ्य – बच्चे के शरीर में गोली की ट्रैजेक्टरी तिरछी एवं ऊपर की दिशा में मिली है। बच्चे की कम ऊंचाई को देखते हुए यह तभी संभव है जब गोली नीचे से ऊपर की ओर बहुत नजदीक से चलाई गई हो।
3. एंट्री वुंड के आकार से संबंधित तथ्य – शौर्य के शरीर में गोली का प्रवेश गाल से और निकासी सिर से हुई है। एंट्री वुंड का आकार आरोपी के .32 बोर रिवाल्वर के अनुरूप है, जबकि 9 MM पिस्टल का एंट्री वुंड बड़ा होता है।
4. आरोपी द्वारा बच्चों को गोली मारने की धमकी – पुलिस एवं परिजनों को समझाने के दौरान भी वह अपनी मां, चाचा, भतीजियों एवं बहनों को बच्चों को गोली मारने की धमकी दे रहा था।
पुलिस की जवाबी कार्रवाई में मारा गया अरविंद
बच्चे को गोली लगने के बाद भी अरविंद ने पुलिस टीम पर फायरिंग की। बच्चों की सुरक्षा एवं आत्मरक्षा में नियंत्रित जवाबी कार्रवाई की गई, जिसमें अरविंद घायल हुआ और अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया।
पूरे अभियान के दौरान एडीजी वाराणसी जोन नवीन अरोड़ा एवं डीआईजी आजमगढ़ परिक्षेत्र सुनील कुमार सिंह घटनास्थल पर मौजूद रहकर दिशा-निर्देश देते रहे।
घटनास्थल से फॉरेंसिक साक्ष्य संकलित किए गए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बच्ची के बयान एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई प्रचलित है।

