पश्चिम बंगाल में 9 मई, 2026 को शुभेंदु अधिकारी ने भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद, उन्हें अब “पूर्व मुख्यमंत्री” (Former CM) के रूप में मिलने वाली सुविधाओं और उन लाभों में बदलाव आएगा जो उन्हें पद पर रहते हुए मिलते थे।
बर्खास्त होने या पद छोड़ने के बाद एक पूर्व मुख्यमंत्री को होने वाले नुकसान और मिलने वाली सुविधाओं का विवरण यहाँ दिया गया है:
1. पद के साथ जाने वाली सुविधाएं (नुकसान)
एक मुख्यमंत्री के रूप में ममता बनर्जी को जो विशेष अधिकार प्राप्त थे, वे अब समाप्त हो जाएंगे:
वेतन और भत्ते: मुख्यमंत्री के रूप में मिलने वाला मासिक वेतन (लगभग ₹1.17 लाख से अधिक) और निर्वाचन क्षेत्र भत्ता (Constituency Allowance) अब नहीं मिलेगा।
आधिकारिक आवास: ‘मुख्यमंत्री निवास’ को खाली करना होगा। हालांकि, कानूनन पद छोड़ने के 15 दिनों के भीतर आवास खाली करने का प्रावधान है।
निर्णय लेने की शक्ति: राज्य के प्रशासनिक फैसलों, ट्रांसफर-पोस्टिंग और कैबिनेट की बैठकों की अध्यक्षता करने का अधिकार अब उनके पास नहीं होगा।
स्टाफ और सचिवालय: मुख्यमंत्री के विशेष सचिवालय, ओएसडी (OSD) और निजी सचिवों की बड़ी टीम अब उनके साथ नहीं रहेगी।
2. पूर्व मुख्यमंत्री को मिलने वाली सुविधाएं
पश्चिम बंगाल के नियमों के अनुसार, एक पूर्व मुख्यमंत्री को कुछ मूलभूत सुविधाएं जीवनभर मिलती रहती हैं:
पेंशन: पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री को पेंशन दी जाती है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, यह लगभग ₹31,000 प्रति माह है। यदि कार्यकाल 5 वर्ष से अधिक रहा है, तो अतिरिक्त सेवा के लिए प्रति वर्ष ₹2,500 अतिरिक्त मिलते हैं।
सुरक्षा: चूंकि ममता बनर्जी ‘Z+’ श्रेणी की सुरक्षा के दायरे में आती हैं, इसलिए मुख्यमंत्री पद न रहने पर भी खतरे के आकलन (Threat Perception) के आधार पर उनकी सुरक्षा जारी रहेगी।
आवास: कई राज्यों में पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला मिलता है, लेकिन पश्चिम बंगाल में यह मामला अदालती फैसलों और राज्य सरकार की नीति पर निर्भर करता है। (ममता बनर्जी आमतौर पर अपने निजी निवास, कालीघाट में ही रहती आई हैं, इसलिए उन पर इसका प्रभाव कम होगा)।
चिकित्सा सुविधा: पूर्व मुख्यमंत्री और उनके परिवार के आश्रितों को सरकारी खर्च पर चिकित्सा सुविधा मिलती है।
3. राजनीतिक प्रभाव
विपक्ष की भूमिका: अब ममता बनर्जी और उनकी पार्टी TMC को विपक्ष में बैठना होगा। अभिषेक बनर्जी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वे जनता के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
सुप्रीम कोर्ट का रुख: ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों को “साजिश” बताते हुए इसे कानूनी चुनौती देने की बात कही है। जैसा कि आपने बिहार के मामले में देखा, यदि राज्यपाल का फैसला मनमाना पाया जाता है, तो मामला फिर से कोर्ट जा सकता है।
सारांश: आर्थिक रूप से एक मुख्यमंत्री को मिलने वाले भत्ते बंद हो जाते हैं, लेकिन मानद सुविधाएं (जैसे पेंशन और सुरक्षा) बनी रहती हैं। ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा नुकसान प्रशासनिक सत्ता और ‘नवान्न’ (सचिवालय) पर नियंत्रण का जाना है।

