बंगाल के रण में BJP ने बदला अपना ‘स्वाद’, अनुराग ठाकुर, मनोज तिवारी से लेकर तमाम बीजेपी नेताओं ने ऑन कैमरा खाई मछली!
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार लड़ाई सिर्फ मतों की नहीं, बल्कि ‘मछली’ की भी हो गई है. टीएमसी ने जो नैरेटिव बंगाल चुनाव में बीजेपी को लेकर सेट किया था, बीजेपी नेता ममता बनर्जी के उस नैरेटिव को तोड़ने में लग गए हैं. बीजेपी के स्टार कैंपेनर्स माछ-भात खाकर टीएमसी को जवाब दे रहे हैं.
बीते कई दिनों में बीजेपी के कई दिग्गजों का मछली-भात खाने का फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर नजर आया है. मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के फायरब्रांड नेता अनुराग ठाकुर का भी माछ-भात खाने का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया. ठाकुर पूरी श्रद्धा के साथ कोलकाता की गलियों में ‘माछ-भात’ (मछली और चावल) का लुत्फ उठाते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो ने बंगाल की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है. क्या बीजेपी अपनी ‘हिंदी-पट्टी’ वाली शाकाहारी छवि को बदलकर बंगाली अस्मिता में रचने-बसने की कोशिश कर रही है?
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव प्रचार के दौरान यह नैरेटिव सेट करने की कोशिश की है कि यदि बीजेपी सत्ता में आई, तो बंगाल के लोगों के खान-पान पर पाबंदी लग जाएगी. टीएमसी का आरोप है कि बीजेपी एक ‘शाकाहारी संस्कृति’ थोपना चाहती है. इसी ‘एंटी-बंगाली’ इमेज को तोड़ने के लिए बीजेपी ने इस बार ‘फूड पॉलिटिक्स’ का सहारा लिया है. अनुराग ठाकुर अकेले ऐसे नेता नहीं हैं. हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने भी बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान मछली खाते हुए अपना वीडियो साझा किया था.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी का यह ‘माछ-भात’ कार्ड टीएमसी के सबसे मजबूत हथियार ‘बंगाली अस्मिता’ की धार को कुंद कर सकता है. बंगाल में मछली सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि पहचान है. बीजेपी नेता अब मछली के बाजार में जाकर दुकानदारों से बात कर रहे हैं और मछली की कीमतों और उत्पादन के मुद्दे पर टीएमसी सरकार को घेर रहे हैं. पीएम मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह तक मछली को लेकर कई रैलियों में टीएमसी के भ्रामक प्रचार पर जवाब दे चुके हैं.

