बिहार पुलिस के इतिहास में एक ऐसा नाम, जो न केवल अपनी ‘खाकी’ के लिए बल्कि अपनी ‘धर्मपरायणता’ और ‘जन-संवाद’ की कला के लिए भी जाना जाता है—गुप्तेश्वर पांडेय (Gupteshwar Pandey)। 1987 बैच के इस पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) को समर्पित एक विशेष पोस्ट:
गुप्तेश्वर पांडेय जी बिहार पुलिस के उन चुनिंदा अधिकारियों में से एक रहे हैं, जिनका नाम हर घर में चर्चा का विषय बना।
अपनी प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ, वे एक ऐसे ‘सोशल कॉप’ के रूप में उभरे जो सीधे जनता से बात करना पसंद करते थे।
प्रमुख गौरवपूर्ण उपलब्धियाँ और योगदान:
* 1987 बैच का जांबाज आईपीएस: अपने लंबे करियर के दौरान, गुप्तेश्वर पांडेय जी ने बिहार के कई संवेदनशील और कठिन जिलों में पुलिस कप्तान के रूप में काम किया। उन्होंने कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले बड़े गिरोहों का सामना किया।
* सोशल मीडिया के ‘कनेक्टिंग कॉप’: वे शायद बिहार के पहले ऐसे शीर्ष पुलिस अधिकारी थे, जिन्होंने सोशल मीडिया (फेसबुक और यूट्यूब) का उपयोग जनता के साथ सीधा संवाद करने के लिए किया। वे वीडियो के माध्यम से जनता को जागरूक करते थे, जो उस समय के लिए एक नई और प्रभावी पहल थी।
* बिहार के डीजीपी (DGP) के रूप में कार्यकाल: डीजीपी के तौर पर उन्होंने बिहार पुलिस को अधिक आधुनिक बनाने और पुलिसिंग में जनता के विश्वास को बढ़ाने के लिए काम किया। उनकी कार्यशैली का एक बड़ा हिस्सा ‘पीपुल-फ्रेंडली पुलिसिंग’ (जन-मित्र पुलिसिंग) पर केंद्रित रहा।
* अध्यात्म और सेवा: सेवानिवृत्ति के बाद, उन्होंने अध्यात्म और समाज सेवा की ओर अपना रुख किया। उनकी आवाज़ में वह ‘ओज’ और ‘ठहराव’ है, जो उनके प्रवचनों में भी साफ झलकती है। वे अब एक ‘कथावाचक’ और सामाजिक विचारक के रूप में भी सक्रिय हैं।
* बेबाक और स्पष्टवादी: वे अपनी बात को बहुत ही बेबाकी और स्पष्टता से रखने के लिए जाने जाते हैं। चाहे वह अपराध हो, समाज हो या धर्म—वे अपनी राय रखने में कभी पीछे नहीं रहे।
“पुलिस सेवा केवल अपराधियों को पकड़ना नहीं है, बल्कि उस समाज को सही दिशा दिखाना है जिसे वह सेवा कर रही है।” — गुप्तेश्वर पांडेय जी का जीवन सेवा और अध्यात्म के इसी संतुलन का प्रतीक है।
संक्षिप्त आंकड़े (Quick Glance):
* पहचान: 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी, पूर्व बिहार डीजीपी (DGP)।
* विशेषता: जन-संवाद कला, सोशल मीडिया का सक्रिय उपयोग, बेबाक व्यक्तित्व, आध्यात्मिक झुकाव।
* योगदान: जन-केंद्रित पुलिसिंग, पुलिस के प्रति जनता का विश्वास बढ़ाना।
* विरासत: एक ऐसे अधिकारी के रूप में जिन्होंने वर्दी और समाज के बीच के ‘गैप’ को कम करने का प्रयास किया।
गुप्तेश्वर पांडेय जी का व्यक्तित्व हमेशा से ही बहुआयामी रहा है। वे अपनी ‘वर्दी’ के दौर में कड़क अधिकारी थे और आज ‘आध्यात्मिक’ राह पर चलकर समाज को नई दिशा दे रहे हैं। 🙏

