समाज में कुछ ऐसे कुंठित विचारों से ग्रसित लोग भी होते हैं जो सच्चाई और निष्पक्षता को समझने के बजाय उसे गलत तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं।
आज कुछ लोग बेवजह गोरखपुर लाइव चैनल को व्यक्तिगत रूप से टारगेट करने में लगे हुए हैं, जबकि सच्चाई बिल्कुल अलग है।
हाल ही में हुए एक सड़क दुर्घटना में एमबीबीएस तृतीय वर्ष के छात्र आकाश पांडेय की बेहद दर्दनाक और दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु हो गई।
यह घटना अत्यंत दुखद है और किसी भी संवेदनशील व्यक्ति का हृदय इसे सुनकर व्यथित हो जाता है।
इस मामले को गोरखपुर लाइव चैनल ने पूरी निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ दिखाने का कार्य किया।
लेकिन कुछ लोग बिना तथ्य जाने या समझे, कुंठा और पूर्वाग्रह से प्रभावित होकर इस चैनल को ही निशाना बनाने में लगे हैं।
शायद वे यह भूल गए हैं कि यही गोरखपुर लाइव चैनल हमेशा समाज की आवाज़ बनने का काम करता रहा है, खासकर जब निषाद समाज के लोगों पर कोई भी बात आई है।
उदाहरण के तौर पर जब भी डॉ. संजय निषाद, सरवन निषाद, राजा निषाद, काजल निषाद, रविन्द्र निषाद जैसे प्रमुख निषाद नेताओं या समाज के लोगों से जुड़ा कोई मुद्दा सामने आया, तब सबसे पहले गोरखपुर लाइव चैनल ने ही उनकी आवाज़ को मजबूती से उठाने और सच को सामने लाने का काम किया।
आज उसी चैनल को कुछ लोग बेवजह बदनाम करने और टारगेट करने का प्रयास कर रहे हैं, जो न केवल अनुचित है बल्कि सच्चाई से भी दूर है। हमें यह समझना चाहिए कि मीडिया का काम सच को सामने लाना है, न कि किसी जाति, व्यक्ति या वर्ग के खिलाफ खड़ा होना।
समाज के जिम्मेदार लोगों से अपेक्षा है कि वे तथ्यों को समझें, निष्पक्षता का सम्मान करें और अनावश्यक आरोपों या कुंठा से प्रेरित बातों से बचें। सच्चाई और न्याय के साथ खड़ा होना ही एक जागरूक समाज की पहचान है।

