कभी-कभी ज़िंदगी ऐसी घटनाएं सामने लाती है।
जिन पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है।
ऐसा ही एक असाधारण मामला सामने आया है।
जहां डॉक्टरों ने चिकित्सा विज्ञान की सीमाओं को नई ऊंचाई दी है।
एक गर्भवती महिला की नियमित जांच के दौरान डॉक्टरों को पता चला कि उसके गर्भ में पल रहे बच्चे के शरीर में एक खतरनाक ट्यूमर विकसित हो रहा है।
डॉक्टरों के अनुसार, यदि समय पर इलाज नहीं किया जाता तो बच्चे की जान को गंभीर खतरा हो सकता था।
हालात की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों की एक टीम ने बेहद साहसिक और दुर्लभ फैसला लिया।
गर्भावस्था के 23वें सप्ताह में मां का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के दौरान गर्भ में पल रहे बच्चे को अस्थायी रूप से बाहर निकालकर उसके शरीर से ट्यूमर को सफलतापूर्वक हटाया गया।
इसके बाद बच्चे को दोबारा सुरक्षित रूप से मां के गर्भ में रख दिया गया।
करीब 13 हफ्तों बाद, गर्भावस्था के 36वें सप्ताह में वही बच्चा पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में पैदा हुआ।
डॉक्टरों का कहना है कि यह ऑपरेशन अत्यंत जटिल था।
लेकिन समय पर सही निर्णय और टीमवर्क ने इसे संभव बनाया।
इस घटना को लोग “दो बार जन्म लेने” की कहानी बता रहे हैं—एक बार ऑपरेशन के दौरान और दूसरी बार दुनिया में आने के समय।
यह मामला न सिर्फ चिकित्सा विज्ञान की ताकत को दर्शाता है।
बल्कि डॉक्टरों की मेहनत, आधुनिक तकनीक और एक मां की उम्मीद की मिसाल भी बन गया है।

