कानपुर की गलियों से निकलकर रनवे तक पहुंचने की यह कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी लगती है, लेकिन यह हकीकत है श्रवण कुमार विश्वकर्मा की.
एक समय था जब उन्होंने टेंपो चलाकर परिवार व बच्चों का गुज़ारा किया और आम आदमी की रोज़मर्रा की मुश्किलों को बहुत करीब से देखा।
सीमित संसाधन थे कम पढ़ाई और ज़िम्मेदारियों के बीच उन्होंने हार मानने के बजाय मेहनत को अपना रास्ता बनाया.
धीरे-धीरे श्रवण कुमार ने कारोबार की दुनिया में कदम रखा. पहले टीएमटी सरिया, फिर सीमेंट, माइनिंग और ट्रांसपोर्ट के बिजनेस में अपनी पहचान बनाई।
ट्रकों का बड़ा नेटवर्क खड़ा किया और जैसे जैसे सफलता मिलता गया वैसे वैसे अनुभव के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ता गया.
कुछ साल पहले उन्हें महसूस हुआ कि भारत में हवाई सफर केवल रूपये वाले ही लोग अपने जीवन में प्रयोग कर रहे हैं और आज भी मध्यम वर्ग की पहुंच से बाहर है।
तो क्यों ना इसी विषय पर मेहनत किया जाए कि सभी ( गरीब अमीर ) के जीवन में इसका प्रयोग हो सके।
इसी सोच से शंख एयरलाइंस का विचार जन्म लिया जिसका मकसद सस्ती किराया , पारदर्शी और भरोसेमंद उड़ानें देना है.
दिसंबर 2025 में नागरिक उड्डयन मंत्रालय से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट मिलने के बाद यह सपना औपचारिक रूप से उड़ान की तैयारी में आ गया। श्रवण कुमार का दावा है कि उनकी एयरलाइन में टिकट की कीमतें अचानक नहीं बढ़ेंगी.
यह कहानी दिखाती है कि ज़मीन से जुड़ा अनुभव अगर सपनों से मिल जाए, तो रास्ता आसमान तक जाता है

