पुलिस के पूर्व डीजीपी श्री प्रशांत कुमार आईपीएस सर को उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने पर कुछ लोग प्रक्रियाएं दे रहे है कि आयोग का अध्यक्ष शिक्षा विभाग या अन्य विभागों से ही संबंधित होना चाहिए।
पर आज की परिस्थितियों में पारदर्शिता और सुचितापूर्ण किसी भी आयोग की परीक्षाएं कराना सबसे बड़ा चुनौती पूर्ण कार्य है ।
इसलिए कि शिक्षा के प्रचार-प्रसार और डिग्रियों की भरमार के कारण प्रत्येक व्यक्ति सरकारी नौकरी के लिए प्रयासरत है ।
सरकारी नौकरी पाने के लिए लोग किसी भी शॉर्टकट को अपने को अपने दिमाग में तैयार कर लेने में कोई गुरेज नहीं कर रहे है।
इसलिए प्राइवेट सेक्टर में आपको अपनी प्रतिभा दिखानी पड़ेगी और भारी मसक्त करनी पड़ेगी।
सरकारी विभागों में आप एक बार आसानी से प्रवेश कर गए तो पूरी जिंदगी आपकी मौज मस्ती में गुजरेगी चाहे आपके अंदर प्रतिभा हो या ना हो।
पर नौकरी आप आराम से कर सकते हैं।
अगर आप में मेहनत करने की आदत नहीं है तब भी सरकारी नौकरी में एडजस्ट हो जाएंगे ।
इसलिए लाखों की संख्या में अभ्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठते हैं।
और संख्या अधिक होने के कारण परीक्षाओं के सेंटर कभी-कभी ऐसे विद्यालयों में बन जाते हैं जो शिक्षा माफिया से संबंधित होते हैं।
और अगर किसी भी स्कूल की मिली भगत से पेपर आउट हो गया तो पूरी परीक्षा निरस्त होना स्वाभाविक है।
जिस एजेंसी को हम एग्जाम कराने का कांटेक्ट करते हैं उस पर 6 एजेंसी के भी 50% लोग पेपर आउट कराने में सहायक हो जाते है।
अथवा अन्य शॉर्टकट अपने में भी किसी को कोई शर्म महसूस नहीं होती है ।
अगर किसी के पास पेपर पहुंच गया उसको खरीदने वाले लाखों लोग तैयार हो जाते हैं ।
भले ही उनका पैसा डूब जाये लाखों की संख्या में पढ़े लिखे लोग दूसरे के स्थान पर सॉल्वर के रूप में परीक्षा देकर जेल जाने को तैयार है ।
इसलिए प्रत्येक आयोग के अध्यक्ष का पद चुनौती पूर्ण है।
और इस तरह की चुनौतियों से निपटने में ही पूर्व डीजीपी श्री प्रशांत कुमार सर का एक लंबा अनुभव यहां भी काम करेगा और सालों से रुकी भर्तियां शुरू हो सकेंगी ।
यूपी सरकार का यह एक सराहनीय कदम है।
इस नई जिम्मेदारी के लिए श्री प्रशांत कुमार सर को हार्दिक शुभकामनाएं व बधाई

