राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक संघ : भ्रष्टाचार-मुक्त भारत के संकल्प का सशक्त प्रहरी
भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में सबसे बड़ी चुनौती भ्रष्टाचार है। यह केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था में फैलता हुआ एक धीमा जहर है जो गरीब, दलित, वंचित, कमजोर, मजदूर और आम नागरिक का अधिकार निगल जाता है। ऐसे समय में जब लोगों की आवाज़ अक्सर अनसुनी रह जाती है, तब राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक संघ एक उम्मीद, एक साहस और एक संगठित प्रतिरोध के रूप में उभरकर सामने आया है।
जनता की आवाज़ — राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक संघ
यह संगठन किसी राजनीतिक रंग या व्यक्तिगत स्वार्थ का नहीं, बल्कि मानवाधिकार संरक्षण, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के उन्मूलन के उद्देश्य से गठित एक राष्ट्रव्यापी अभियान है। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संतोष नयन बरनवाल के नेतृत्व में संगठन तेजी से जन-जन से जुड़ रहा है और ऐसी आवाज़ों को सामने ला रहा है जिन्हें वर्षों से दबाया जाता रहा।
राष्ट्रीय संरक्षक श्री अजय उपाध्याय संगठन के कैडर को मजबूत करने एवं देशभर में नेटवर्क विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। संगठन की रणनीति, मार्गदर्शन और प्रशासनिक नीति की रीढ़ माने जाते हैं राष्ट्रीय सलाहकार डॉ. देवेंद्र सिंह बघेल, पंडित ओमप्रकाश ओझा रतलामी मध्यप्रदेशाध्यक्ष व राष्ट्रीय संगठन मंत्री, जिनके नेतृत्व में संगठन की राष्ट्रीय हेल्पलाइन प्रतिदिन सैकड़ों पीड़ितों को राहत प्रदान कर रही है।
“जब कोई न सुने — तब नेशनल एंटी करप्शन को चुने”
यह केवल एक नारा नहीं बल्कि हजारों पीड़ितों का अनुभव है। देश के लगभग हर राज्य, हर शहर, हर कस्बे में इस संगठन के पदाधिकारी सक्रिय हैं।
थानों, गली-मोहल्लों, तहसीलों, प्रशासनिक दफ्तरों से लेकर बड़े भ्रष्टाचार मामलों तक—संगठन अपनी पैठ और दृढ़ता दोनों के लिए जाना जाता है।
गरीब, दबे-कुचले, पीड़ित और शोषित व्यक्ति के लिए यह संगठन आज एक मजबूत सहारा है।
न्याय से वंचित व्यक्ति जब समूची व्यवस्था से निराश हो जाता है, तब वह राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक संघ के दरवाज़े पर दस्तक देता है, और संगठन बिना किसी भेदभाव के उसका साथ देता है।
डिजिटल युग में सक्रिय—24×7 शिकायत निवारण तंत्र
संगठन के पास —
राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर
24×7 ईमेल सहायता केंद्र
व्हाट्सऐप आधारित शिकायत निस्तारण प्रणाली
अपनी स्वतंत्र मीडिया सेल उपलब्ध है।
रोज देशभर से पुलिस अत्याचार, जमीन विवाद, रिश्वतखोरी, प्रशासनिक बेरुखी, मानवाधिकार उल्लंघन, घरेलू हिंसा, क्षेत्रीय उत्पीड़न और भ्रष्टाचार के कई मामले संघ के पास आते हैं।
कुछ ही समय पहले शाहजहांपुर से एक युवक को संदिग्ध परिस्थितियों में पुलिस द्वारा उठाए जाने और फर्जी एनकाउंटर का भय जताने की शिकायत संगठन की हेल्पलाइन पर आई। राष्ट्रीय सलाहकार डॉ. देवेंद्र सिंह बघेल ने तत्काल हस्तक्षेप कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, जिससे पीड़ित की जान बच सकी।
ऐसे असंख्य उदाहरण संगठन की विश्वसनीयता को दर्शाते हैं।
राष्ट्रीय कार्यालय — गोरखपुर : रणनीति का केंद्र
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित राष्ट्रीय कार्यालय संघ की संचालन प्रणाली का मुख्य केंद्र है। हाल ही में राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय संरक्षक, राष्ट्रीय सलाहकार और वरिष्ठ पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक यहां आयोजित हुई। बैठक में—
संगठन विस्तार
महिला एवं युवा विंग की मजबूती
राज्य और जिला स्तर पर कार्यकारी नियुक्तियाँ
मानवाधिकार प्रकोष्ठ की पुनर्संरचना
भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की नई रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक की गंभीरता इतनी थी कि स्थानीय पुलिस प्रशासन ने भी उस पर विशेष नजर रखी, क्योंकि संगठन की बढ़ती ताकत और कठोर रुख से भ्रष्टाचारियों में भय का माहौल है।
संगठन का मजबूत जनसंपर्क नेटवर्क
संघ की सबसे बड़ी शक्ति इसका विशाल और अनुशासित कार्यकर्ता तंत्र है, जो—
जनता की समस्याएँ सुनता है
बिना भय और बिना लालच के कार्रवाई करता है
सबूत जुटाने में पीड़ित का साथ देता है
प्रशासन के समक्ष मजबूती से मुद्दा उठाता है
देश-विदेश से लोग इस संगठन से जुड़ रहे हैं। यह किसी दल, धर्म, जाति या वर्ग की सीमा में बंधा संगठन नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाला राष्ट्रीय आंदोलन बन चुका है।
नीतिगत मूल्यों पर आधारित संगठन
राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक संघ निम्न सिद्धांतों पर कार्य करता है —
1. पूर्ण पारदर्शिता
2. नैतिक आचरण और सामाजिक उत्तरदायित्व
3. जनहित को सर्वोपरि रखना
4. निष्पक्षता और संवेदनशीलता
5. कानूनी प्रावधानों का पालन और विधिक सहायता प्रदान करना
6. भ्रष्टाचार के खिलाफ शून्य सहिष्णुता नीति
7. गरीब और वंचित वर्ग को प्राथमिकता
इन सिद्धांतों ने ही संगठन को जनमानस में विश्वसनीय और सशक्त बनाया है।
भविष्य का विज़न — एक सशक्त, भ्रष्टाचार-मुक्त भारत
संगठन की योजना है कि—
आगामी समय में हर जिले में स्वतंत्र कार्यालय स्थापित हों
महिला सुरक्षा प्रकोष्ठ अधिक सक्रिय हो
विद्यालयों, कॉलेजों और गांवों में जागरूकता अभियान चलें
एडवोकेट पैनल को और विस्तारित किया जाए
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर त्वरित सेवा और मजबूत की जाए
एक ऐसा भारत जहां आम आदमी बिना रिश्वत, बिना डर और बिना दबाव के अपने अधिकार प्राप्त कर सके—यही इस संगठन का भविष्य का लक्ष्य है।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक संघ आज सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति का नाम बन चुका है। यह उन लाखों लोगों की आवाज़ है जो न्याय के लिए भटकते हैं। यह उन युवाओं की उम्मीद है जो एक स्वच्छ और पारदर्शी भारत का सपना देखते हैं।
जब देश में कोई न सुने
तब राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक संघ सुनता है, समझता है और लड़ता है।
यह लड़ाई लंबी है, कठिन है, लेकिन यह संगठन निश्चय, साहस और राष्ट्रहित की भावना के साथ इस मिशन को आगे बढ़ा रहा है।

