पहली बार गोरखपुर घूमने आए थे तीनों दोस्त
कानपुर के मनीष और हरियाणा के हरदीप व प्रदीप गोरखपुर पहली बार आए थे। यहां के रहने वाले उनके दोस्तों चंदन सैनी और राणा प्रताप चंद से यहां हो रहे बदलावों की बात सुनकर उनके मन में गोरखपुर घूमने की इच्छा पैदा हो गई थी। हालांकि इसके पहले वह गोरखपुर को माफिया और गुंडागर्दी की वजह से जानते थे। उन्हें माफिया श्री प्रकाश शुक्ला का नाम पता था। पर गोरखपुर के मुख्यमंत्री की छवि और बदलते माहौल की चर्चा ने उन्हें न सिर्फ घूमने के लिए बल्कि प्रापर्टी के व्यापार की संभावनाएं तलाशने के लिए भी यहां खींच ले आया था।
गोरखपुर में आकर अपने दोस्त मनीष की जान गंवा चुके हरदीप और प्रदीप काफी दुखी हैं। उधर, चंदन सैनी भी सकते में हैं। चंदन सैनी कहते हैं कि मैं जिस गोरखपुर की तारीफ करता था पुलिस ने उसकी छवि को ही उल्टा पेश कर दिया। भोजपुरी फिल्मों में काम करने वाले चंदन का कहना था कि गोरखपुर की बखान करते मैं थकता नहीं था, रामगढ़ झील के बारे में बताता था। मेरे बखान का ही नतीजा था कि हरदीप और प्रदीप ने गोरखपुर घूमने की इच्छा जताई थी और मनीष भी साथ आया था। मनीष से चंदन व अन्य की हरदीप और प्रदीप के जरिये ही दिल्ली और हरियाणा में मुलाकात हुई थी। वह पहले ही गोरखपुर आने वाले थे लेकिन लॉकडाउन की वजह से नहीं आ पाए थे।
चंदन ने बताया कि सोमवार की सुबह साढ़े आठ बजे होटल पहुंचने के बाद तीनों से बात हुई थी। उन्होंने कुछ देर आराम किया था। पूरी रात कार ड्राइव कर गोरखपुर आए थे। दोपहर में 12 बजे मैं, राणा प्रताप चंद और धनंजय त्रिपाठी के साथ होटल पहुंचा। कुछ देर बातचीत के बाद हम लोग घूमने निकले। मैंने उन्हें रामगढ़ झील दिखाई। मनीष व अन्य ने काफी तारीफ की। कहा कि ऐसी झील तो पूरे यूपी में कहीं नहीं है। रात में ढाबे पर हम लोगों ने मटन खाया, होटल लौटे कुछ देर बात कर हम तीनों अपने घर के लिए लौट गए जबकि तीनों दोस्त कमरे में रुक गए। मंगलवार को हमें गोरखनाथ मंदिर दर्शन करने और फिर चिड़ियाघर घूमने जाना था। हरदीप और मनीष प्रापर्टी का काम भी करते हैं। हम यहां पर इस तरह के व्यापार की संभावनाएं तलाश रहे थे पर गोरखपुर पुलिस ने सारी तस्वीर को ही उल्टा पेश कर दी।
बंद कमरे से आती रही चींखे
हरदीप सिंह चौहान ने बताया कि पुलिस उनके साथ इस तरह का व्यवहार कर रही थी कि मानो वे कोई अपराधी हैं। जब हमने अपना और प्रदीप का आईकार्ड दिखा दिया तो पुलिस को चले जाना चाहिए था। लेकिन मनीष को लेकर पुलिस उलझ गई। मनीष ने आधी रात में चेकिंग पर सवाल उठाया तो पिटाई कर दी। उन्होंने बताया कि उन दोनों को तो पुलिस वालों ने होटल के कमरे से बाहर कर दिया था और अंदर मनीष को पीट रहे थे। उसकी चींखे आ रही थीं। हम लोग अब तक फिल्मों में ही देखते थे कि पुलिस इस तरह चेकिंग करते हुए लोगों की पिटाई करती है पर असल जिंदगी में भी देख लिया।
समय से हास्पिटल न ले जाने का भी आरोप
खून से लथपथ मनीष को आधी रात को पुलिस एक प्राइवेट हास्पिटल ले गई थी लेकिन वहां इलाज नहीं हुआ तब मेडिकल कालेज ले गई। देर रात 2.15 बजे मेडिकल कालेज में उनके पहुंचने की एंट्री दिखाई गई है। यही नहीं आरोप है कि रात में बिजली कटवाकर शव को मोर्चरी में रखा दिया गया। दोस्तों का कहना है कि अगर सही से इलाज ही हो गया होता तो शायद मनीष की जान बच जाती।

