श्री श्री श्री108श्री शतचंडी महायज्ञ का छठवे दिन
महाराजगंज, सदर तहसील अंतर्गत शिकारपुर कोटही माता मंदिर नवदिवसिय महायज्ञ में यज्ञाचार्य बलिराम पांडेय अपने सहयोगियो सहित अपने वैदिक मंत्रों की आहुति देकर वातावरण को गुंजायमान किया। जय मां सरस्वती आदर्श रामलीला मंडल रामनगर ने लीला के माध्यम से दिखाया कि जब राजा दशरथ राम को राजा बनाने के साथ उनके राज्याभिषेक की घोषणा करते है तब उस मंथरा (अमरजीत) ने ही कैकेयी (सागर)को भड़का कर इसमें विघ्न डाला था। क्योंकि श्री राम (मुन्ना)के राजा बनने की बात का सोचकर वो सोचने लगी की राम राजा बनेंगे तो कौशल्या राजमाता कहलाएगी और तब कैकेयी नहीं बल्कि कौशल्या रानियों में श्रेष्ठ हो जाएगी। फिर मैं नहीं बल्कि उनकी दासियां मुझसे श्रेष्ठ हो जायेगी और फिर कोई भी मेरा सम्मान नहीं करेगा। फिर मंथरा ने कैकेयी को भड़काना शुरू किया और कहा, ‘रानी आप यह मत भूलिए राम अगर अयोध्या के राजसिंहासन के अधिकारी बने तो भरत राज परम्परा से अलग हो जाएंगे’ अपने बेटे के भविष्य को अंधकार में देखते हुए रानी कैकेयी ने मंथरा से सलाह ली कि उन्हें क्या करना चाहिए तब मंथरा ने उन्हें राजा से अपने दो वचन की बात को याद दिलाते हुए राजा दसरथ से उन वचनों में राम के वनवास और भरत के लिए राजसिंहासन मांग लेनी की सलाह दी। उसके बाद कैकेयी ने विल्कुल वैसा ही किया जैसे मंथरा ने कहा था और रघुवर कुल की परम्परा के हिसाब से राजा दशरथ को अपने वचनों का पालन कर राम को वनवास और भरत को राजसिंहासन देना पड़ा।इस लीला को देख गंगा निषाद, विश्वनाथ चौबे,बेनी यादव,उमेश आदि श्रद्धालुओ की आँखे नम हो गई।

