रामकोला विधानसभा का राजनीतिक इतिहास
कुशीनगर,आज गन्ने की मिठास वाले इस विधान सभा सीट का अपना इतिहास रहा है। वर्ष 1977 से चुनाव की बात करें तो तब विधानसभा चुनाव में इस सीट से जेएनपी से बांकेलाल ने जीत हासिल की थी और पहली बार विधायक चुने गए। साल 1980 में कांग्रेस के सुगराव सिंह जीते थे। वर्ष 1985 में कांग्रेस के सुग्रीव सिंह को मतदाताओं ने 22147 मत देकर रामकोला की रहनुमाई करने का मौका दिया था वहीं एलकेडी के हरिशंकर कुशवाहा दूसरे स्थान पर रहें। वर्ष 1989 में जनता दल से मदन गोविंद राव को रामकोला की जनता ने मौका दिया और 29058 मत हासिल कर कांग्रेस के सुग्रीव सिंह को मात दी थी। 1991 में रामलहर के बीच हुए चुनाव में रामकोला विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी अंबिका सिंह को मतदाताओं ने विधानसभा में भेजा था। 1993 में भाजपा प्रत्याशी की हैसियत से अंबिका सिंह एकबार फिर चुनाव मैदान में उतरे और उन्होंने सपा उम्मीदवार अजीमुलहक को हराकर अपनी सीट बचा ली। वर्ष 1996 के चुनाव में निर्दल प्रत्याशी की हैसियत से राधेश्याम सिंह मैदान मे उतरे और भाजपा प्रत्याशी अंबिका सिंह को करारी शिकस्त देकर विधानसभा पहुंचे। 14वीं विधानसभा के लिए हुए चुनाव में राधेश्याम सिंह को सपा ने टिकट दिया। उन्होंने बसपा प्रत्याशी अजीमुलहक को 22 हजार से ज्यादा मतों से हराकर अपनी सीट बचा ली। 2007 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी जसवंत उर्फ अतुल सिंह ने सपा प्रत्याशी राधेश्याम सिंह को हराकर जीत का सेहरा अपने सिर बांध लिया। इस चुनाव में अतुल सिंह को 45097 मत मिले थे जबकि सपा प्रत्याशी राधेश्याम सिंह को 40810 वोट प्राप्त हुए थे। विधानसभा के लिए वर्ष 2012 में हुए चुनाव की बात करें तो 3,02316 मतदाओं में से 52.09 प्रतिशत वोटरों ने अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग किया था। लखनऊ की लालसा पाले 17 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे थे। इन सबको पछाड़ते हुए डॉक्टर पूर्णमासी देहाती ने 50861 मत हासिल कर इस सीट को सपा की झोली में डाल दिया था।
रामकोला (सुरक्षित) विधानसभा सीट पर वर्ष 2017 में भाजपा समर्थित सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने जीत दर्ज की थी। वर्ष 2017 में रामकोला (सुरक्षित) में कुल 52.10 प्रतिशत वोट पड़े। 2017 में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से रामानंद बौद्ध ने समाजवादी पार्टी के पूर्णमासी देहाती को 55729 वोटों के मार्जिन से हराया था।

