11.5.2026
यूं तो प्रत्येक व्यक्ति प्रसन्न रहना चाहता है, और उसके लिए वह अनेक प्रकार से प्रयत्न भी करता है।
कुछ लोगों को यह भ्रम है कि *”यदि हम बहुत अधिक धन कमा लेंगे, तो हम प्रसन्न या सुखी हो जाएंगे।”* तो इस भ्रांति से भी बचना चाहिए।
*”ठीक प्रकार से जीवन चलाने के लिए भौतिक वस्तुओं की आवश्यकता होती है.” यह बात ठीक है।
“अतः आवश्यक भौतिक साधनों का संग्रह तथा उनका उपयोग अवश्य करें।
” “परंतु उसकी सीमा अवश्य बनाएं।
उससे आपका जीवन अच्छा चलेगा। परंतु भौतिक साधनों से व्यक्ति मन में भी प्रसन्न रहेगा, इस बात की गारंटी नहीं है।”*
मानसिक प्रसन्नता के लिए तो अच्छे लोगों की संगति आवश्यक है। *”जिन लोगों के विचार शुद्ध हैं, जिनकी भाषा में नम्रता है।
जिनकी भाषा मीठी तथा सभ्यता पूर्ण है।
जिनका आचरण शुद्ध है।
जो लोग सबके साथ न्याय पूर्वक प्रेम पूर्वक पक्षपात रहित व्यवहार करते हैं।
सच्चे ईश्वर भक्त देशभक्त और ईमानदार हैं।
ऐसे लोगों की संगति से आपका मन प्रसन्न रह सकता है।
इस बात की गारंटी है।”* यदि आप ऐसे लोगों के साथ रहें।
उनके साथ बातचीत करें।
लेन देन करें।
उठना बैठना आदि व्यवहार रखें।
तो आप मानसिक रूप से भी प्रसन्न रह सकते हैं।
*”दुष्टों की संगति से तो आपके जीवन में अशांति ही बढ़ेगी।
इसलिए उनसे तो बचना अर्थात दूर रहना ही ठीक है।”*
—- *”स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक – दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात.”*

