पति की ला’श दरवाजे पर थी और बाहर लेनदार पैसों के लिए शोर मचा रहे थे—लेकिन उस दिन भी बिहार के दरभंगा की पूजा राजपूत टूटी नहीं। पूजा की जिंदगी बचपन से ही अग्निपरीक्षा जैसी रही; पिता की कम पेंशन में घर चलाने की जद्दोजहद से लेकर पढ़ाई के लिए परिवार से लड़ने तक, उन्होंने हर कदम पर सं’घर्ष देखा। शादी के बाद ससुराल पहुंचीं तो वहां भी सुकून नहीं था। पति का बिजनेस ठप हो गया, घर में फाके होने लगे और हालात का जिम्मेदार पूजा को ठहराते हुए लोगों ने उन्हें “कु’लच्छि’नी” तक कह डाला।
हालात ये थे कि मायके से आने वाले राशन पर दो बच्चों की परवरिश हो रही थी। लेकिन हार मान लेना पूजा के स्वभाव में नहीं था। उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत लोन लेने की ठानी और भारी मशक्कत के बाद साढ़े दस लाख का लोन हासिल किया। अपने गहने बेचकर और कुछ और पैसे उधार लेकर उन्होंने दरभंगा में 11 कमरों का “जानकी पैलेस” होटल शुरू किया। धीरे-धीरे मेहनत रंग लाने लगी और जिंदगी की गाड़ी पटरी पर लौटने ही वाली थी कि 2019 में एक और वज्रपात हुआ—पति की अचानक मृ’त्यु हो गई।
जब पूजा पति का शव लेकर घर पहुंचीं, तो संवेदना जताने के बजाय लोग दरवाजे पर खड़े होकर अपने उधार के पैसे मांगने लगे। एक शख्स ने तो होटल पर ताला जड़ने तक की ध’मकी दे दी। उस भीषण दुख में भी पूजा ने हिम्मत जुटाई, रातों-रात पैसों का इंतजाम कर कर्ज चुकाया और अ’पमान का घूंट पीकर भी अपने कदम पीछे नहीं खींचे।
पति के निधन के बाद सिर पर 22 लाख का कर्ज और ऊपर से लॉ’कडाउ’न की मार, चुनौतियां पहाड़ जैसी थीं। लेकिन अपने गहने फिर से दांव पर लगाकर और दिन-रात एक करके उन्होंने होटल बिजनेस को न सिर्फ संभाला, बल्कि उसे कामयाबी के शिखर पर ले गईं। आज पूजा राजपूत एक सफल बिजनेसवुमन हैं, उनके बच्चे प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ रहे हैं और उनकी कहानी हर उस महिला के लिए मिसाल है जो मुश्किलों से घबरा जाती है। पूजा का साफ कहना है— “एक औरत की असली ताकत उसका आत्मविश्वास है, यही उसका सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।”

