भारतीय नौकरशाही में जब भी निडरता और ईमानदारी का जिक्र होता है।
तो………
सबसे पहला नाम IPS डी. रूपा मौदगिल का आता है। उनके करियर का सबसे ऐतिहासिक और साहसिक पल साल 2004 में आया था।
जब उन्होंने कोर्ट के वारंट का पालन करते हुए मध्य प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती को गिरफ्तार करने के लिए एक पुलिस टीम का नेतृत्व किया था।
एक सिटिंग CM को गिरफ्तार करना भारत के प्रशासनिक इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक था।
अपनी इन्वेस्टिगेटिव और बेखौफ कार्यशैली के कारण डी. रूपा हमेशा सत्ता के निशाने पर रहीं।
2017 में उन्होंने एक और बड़ा धमाका किया, जब उन्होंने बेंगलुरु की सेंट्रल जेल के अंदर चल रहे ‘VIP ट्रीटमेंट’ और भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया।
उनकी इस रिपोर्ट ने पूरे देश की राजनीति और प्रशासन में हड़कंप मचा दिया था।
सच बोलने की इस जिद की उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी है।
अपने 20 साल से ज्यादा के पुलिस करियर में उनका लगभग 40 बार ट्रांसफर किया जा चुका है।
लेकिन इतने दबाव और लगातार होने वाले ट्रांसफर्स के बावजूद डी. रूपा ने कभी समझौता नहीं किया।
उनका सफर इस बात का सबसे बड़ा और एक्सक्लूसिव प्रमाण है कि शासन, जवाबदेही और सार्वजनिक सेवा में हिम्मत से बड़ा कोई हथियार नहीं होता!

