*समस्त ब्राह्मण समाज के लिए चिंतन योग्य
लेख*
प्रिय साथियों,
इस समूह में आज हमें एक ऐसे विषय पर बात करने की जरूरत है जो हर घर में हो रहा है, लेकिन कोई खुलकर बात नहीं करता। यह विषय है हमारे समाज में विवाह के लिए हमारे बच्चों की बढ़ती उम्र और परिवार में बच्चों की घटती संख्या। विवाह योग्य बच्चों की बढ़ती उम्र के नक्सल भी बहूत हो रहे हैं। आजकल बच्चे नौकरियों के कारण अपने घरों से दूर किसी अन्य बडें शहरों में किराये पर मकान लेकर या पीजी में कई-कई बच्चे इकट्ठे रहते हैं और उनका एक खुलेपन के वातावरण का ऐसा सर्कल बन जाता है कि प्राय हमारी अधिकांश युवा पीढ़ी सब धीरे-धीरे नशों के चक्कर में फंस रहे हैं और अपनी dignity से compromise कर ले रहे हैं जिससे अनेक सामाजिक समस्याएं माता-पिता और समाज के लिए खड़ी हो रही हैं।
आइए एक सरल गणना करें:
1. अगर लड़के और लड़कियों की शादी 20-22 साल की उम्र में होती है, तो 100 साल में हमें 5 पीढ़ियाँ मिलती हैं।
2. अगर शादी की उम्र 25 साल है, तो हमें 4 पीढ़ियाँ मिलती हैं।
3. अगर शादी 33 साल की उम्र में होती है, तो हमें मुश्किल से 3 पीढ़ियाँ मिलती हैं।
4. आजकल लड़कियों की शादी 29-30 साल और लड़कों की शादी 32-35 साल की उम्र में होती है। इसका मतलब है कि हमारी पीढ़ियाँ तेजी से घट रही हैं।
एक और गणना:
100 लोग = 50 जोड़े
अगर हर जोड़े के पास केवल 1 बच्चा है → अगली पीढ़ी में 45-46 लोग रह जाएंगे।
तीसरी पीढ़ी में आबादी लगभग समाप्त हो जाएगी।
यह भविष्यवाणी नहीं है, यह गणित है और हमारे सामने हो रहा है।
आज क्या हो रहा है? गांव खाली हो रहे हैं। घरों के रसोई बंद हो रहे हैं, बच्चों की आवाज नहीं आती। लड़कियाँ 30-35 साल तक अविवाहित रहती हैं। लड़के 35 साल से अधिक उम्र के हो जाते हैं और फिर भी शादी नहीं करते। और जब वे शादी करते हैं, तो उनके पास केवल एक बच्चा होता है। कुछ मामलों में तलाक हो जाता है और माता-पिता अकेले रह जाते हैं।
नई बहुएँ क्या कहती हैं?
1. “एक ही बच्चा होगा, वरना करियर बर्बाद हो जाएगा, शरीर खराब हो जाएगा, और जीवन मजा नहीं आएगा।”
2. क्या हम इसे “आधुनिक सोच” कहें या अपना “आत्म-विनाश”?
3. सबसे बड़ा गलत कौन करता है? लड़की का पिता!
4. वही पिता जिसने 22-25 साल की उम्र में शादी की और घर बसाया,
5. आज अपनी बेटी को 30-32 साल तक “प्रिंसेस” बनाकर रखता है।
6. कभी कहता है – “करियर बनने दो।”
7. कभी कहता है – “सही लड़का नहीं मिल रहा।”
8. कभी डरता है – “सोसायटी क्या कहेगी?”
क्या होता है?
1. बेटी डिप्रेशन में जाती है,
2. आईवीएफ ट्रीटमेंट कराती है,
3. या शादी के बाद तलाक हो जाता है।
4. और पूरा समाज धीरे-धीरे घटता जाता है।
आज की स्थिति चिंताजनक है:
1. लड़कों की औसत शादी की उम्र: 32
2. लड़कियों की औसत शादी की उम्र: 29
3. प्रति जोड़े बच्चों की औसत संख्या: 1
4. हर चार में से एक जोड़े के पास बच्चे नहीं हैं
5. तलाक की दर सबसे तेजी से बढ़ रही है
6. लाखों युवा अविवाहित हैं – शादी ही नहीं हो रही।
क्या करें?
1. शादी को प्राथमिकता दें – लड़कों की उम्र 22-23, लड़कियों की 20-22
2. बेटियों के पिता – समझें, आपकी बेटी की उम्र, भावनाएँ, और भविष्य दांव पर है।
3. उम्मीदें कम करें, समझ बढ़ाएँ, अपनी बेटी की जिंदगी बचाएँ।
एक आखिरी चेतावनी:
अगर हमने आज आँखें नहीं खोलीं –
1. छोटे बच्चे नहीं होंगे
2. युवा नहीं रहेंगे
इतिहास लिखेगा: आइए सोचें, खुद को बदलें, और अपने समाज को बचाएँ – आज से ही सिर्फ अपने सगी संबधी व मित्र(ज्यादा कुछ नहीं दौडना) को अपना अच्छा मित्र बनाकर उनको व उनके बच्चों से वार्तालाप करें
इस संदेश को हर घर तक पहुँचाए.
धन्यवाद
🙏🙏
*पंडित ओम प्रकाश ओझा रतलामी मध्यप्रदेश राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक संघ – भारत*

