07 #रामायण…. #मेघनाथ का #शक्ति #बाण और #विज्ञान ….। लंका का आकाश रक्तवर्ण था। चहुंओर ब्रह्मांड के सर्वश्रेष्ठ योद्धाओं की हुंकार से धरा का वह भू भाग कांप रहा था। यह युद्ध केवल दो योद्धाओं का नहीं, बल्कि ‘पदार्थ’ (Matter) और ‘प्रति-पदार्थ’ (Anti-matter) के बीच का संघर्ष था। मेघनाद, जो अंतरिक्ष विज्ञान और ध्वनि की तरंगों (Sonic frequencies) का स्वामी था, जानता था कि लक्ष्मण कोई साधारण मानव नहीं, बल्कि ‘अनंत’ (The Infinity) के अवतार हैं। उन्हें पराजित करने के लिए भौतिक नियमों को तोड़ना आवश्यक था।
यह कोई साधारण पौराणिक कथा नहीं है, बल्कि एक ‘कॉस्मिक लैबोरेट्री’ (Cosmic Laboratory – ब्रह्मांडीय प्रयोगशाला) का ब्लूप्रिंट है। हम त्रेता युग के उस युद्ध क्षेत्र में उतर रहे हैं जहाँ अस्त्र-शस्त्र केवल धातु के टुकड़े नहीं, बल्कि क्वांटम एंटैंगलमेंट (Quantum Entanglement – क्वांटम उलझाव) और मॉलिक्यूलर रिस्ट्रक्चरिंग (Molecular Restructuring – आणविक पुनर्गठन) के जीवंत उदाहरण थे।
आइए, आधुनिक विज्ञान की आँखों से इस रहस्यमयी गाथा को आत्मसात करते हैं।
लंका का वह रणक्षेत्र युद्धभूमि नहीं, बल्कि एक विशाल ‘पार्टिकल एक्सेलरेटर’ (Particle Accelerator – कण त्वरक) बन चुका था। आकाश रक्तवर्ण था और हवा में आयनित कणों (Ionized particles) की गंध थी।
अचानक, मेघनाद के अट्टहास ने अंतरिक्ष की परतों को चीर दिया। वह अपने रथ पर खड़ा होकर लक्ष्मण की ओर संकेत करते हुए गरजा—
“लक्ष्मण! तुम साधारण क्षत्रिय हो सकते हो, पर मैं ‘नाद’ और ‘शून्य’ का स्वामी हूँ। तुम्हारी गति को आज मैं उस बिंदु पर ले जाकर रोक दूँगा जहाँ से समय भी वापस नहीं लौटता! संभालो अपनी नियति को!”
लक्ष्मण ने शांत भाव से प्रत्यंचा चढ़ाई और उत्तर दिया— “मेघनाद, अहंकार अक्सर उन नियमों को भूल जाता है जो इस सृष्टि को थामे हुए हैं। चलाओ अपना अस्त्र, देखें तुम्हारा विज्ञान श्रेष्ठ है या सत्य!”
तभी मेघनाद ने उस अस्त्र का आह्वान किया जिसे इतिहास ‘वीरघातिनी’ कहता है, लेकिन आधुनिक विज्ञान इसे ‘Directed Energy Weapon’ (निर्देशित ऊर्जा हथियार) के चरम रूप में देखता है।
रामचरितमानस में बाबा तुलसीदास एक चौपाई लिखते हैं…..
रिपु हननी अबिचल तेहि पाहीं। अमोघ सक्ति चलाइ तेहि माहीं॥
भावार्थ: मेघनाद के पास शत्रुओं का संहार करने वाली एक ऐसी शक्ति थी जो कभी अपना लक्ष्य नहीं चूकती (अविचल और अमोघ)। उसने उस शक्ति का संधान लक्ष्मण पर किया।
मेघनाद द्वारा मंत्रों का उच्चारण करना वास्तव में एक ‘अकुस्टिक फ्रीक्वेंसी’ (Acoustic Frequency – ध्वनिक आवृत्ति) सेट करना था। ये मंत्र ध्वनि तरंगों के माध्यम से उस अस्त्र के भीतर मौजूद उप-परमाणु कणों (Sub-atomic particles) को उत्तेजित कर रहे थे। ‘वीरघातिनी’ का अर्थ है—जो वीरों के प्राणों का हनन करे, लेकिन यहाँ ‘हनन’ का अर्थ मृत्यु नहीं, बल्कि ‘सेल्यूलर शटडाउन’ (Cellular Shutdown – कोशिकीय कार्यप्रणाली का बंद होना) था।
अब क्वांटम भौतिकी का दृष्टिकोण यहां काम करता है। यह अस्त्र ‘क्वांटम टनलिंग’ (Quantum Tunneling) के सिद्धांत पर कार्य कर रहा था। इसने लक्ष्मण जी के बाणों और कवच को बिना स्पर्श किए उनके शरीर के भीतर प्रवेश किया और सीधे उनके ‘बायो-मैग्नेटिक केंद्र’ (हृदय) पर प्रहार किया।
गोस्वामी तुलसीदास जी लिखते हैँ
तासु अघात भई उर साला। मू्र्छित भएउ लखन तेहि काला॥
यानी मेघनाद के उस शक्ति प्रहार से लक्ष्मण के हृदय में ऐसी मर्मभेदी पीड़ा हुई कि वे उसी क्षण संज्ञाहीन (मूर्छित) होकर गिर पड़े।
वैज्ञानिक डिकोडिंग से देखें तो यह स्थिति ‘द न्यूरो-ब्लॉक’ और सेलुलर कोमा की थी । जब यह शक्ति लक्ष्मण के हृदय (Cardiac Plexus) से टकराई, तो इसने शरीर के ‘बायो-इलेक्ट्रिकल सिग्नल’ (जैविक विद्युत संकेतों) को पूरी तरह जाम कर दिया।
यह वैज्ञानिक भाषा में कह सकते हैं द हार्ट-ब्रेन डिसकनेक्ट। विज्ञान कहता है कि हृदय का अपना एक विद्युत-चुंबकीय क्षेत्र (Electromagnetic Field) होता है। वीरघातिनी शक्ति ने एक ऐसी Scalar Wave (स्केलर वेव – अदिश तरंग) छोड़ी जिसने हृदय की धड़कन को रोका नहीं, बल्कि उसे एक ‘सस्पेंडेड एनिमेशन’ (Suspended Animation – निलंबित चेतना) की स्थिति में डाल दिया। यह ठीक वैसा ही था जैसे किसी सुपरकंप्यूटर को ‘हाइबरनेशन’ (Hibernation) मोड में डाल दिया जाए।
क्वांटम डिकोहेरेंस (Quantum Decoherence) की दृष्टि को थोड़ा विस्तार देते हैं। दरअसल यहाँ शरीर की कोशिकाएं जो एक लय में थीं, अचानक अव्यवस्थित हो गईं। रक्त में मौजूद हीमोग्लोबिन के लोह-तत्व (Iron) को क्षण भर के लिए विचुंबकित (Demagnetize) कर दिया गया, जिससे मस्तिष्क तक ऑक्सीजन का प्रवाह रुक गया। यह मृत्यु नहीं, बल्कि एक ‘डीप कोमा’ (Deep Coma) था जिसे केवल विशिष्ट ‘मॉलिक्यूलर वाइब्रेशन’ (आणविक कंपन – संजीवनी) से ही जगाया जा सकता था।
इस घटना से रहस्यमयी वातावरण ऐसा बन गया जैसा ‘एंट्रोपी’ बनाम ‘ऑर्डर’ का हो। जैसे ही लक्ष्मण धराशायी हुए, मेघनाद अपने रथ से कूदकर नीचे आया। धूल और धुएँ के बीच उसकी परछाईं डरावनी लग रही थी। उसने लक्ष्मण के अचेत शरीर की ओर देखकर विद्रूप मुस्कान के साथ कहा—
“लक्ष्मण, तुम्हारी चेतना अब मेरे ‘वीरघातिनी कोड’ में कैद है। तुम न जीवित हो, न मृत; तुम बस एक अनंत शून्य में हो जहाँ से बाहर आने का मार्ग केवल मेघनाद जानता है!”
अब तक आपके मन में कई सवाल आ चुके होंगे।
लेकिन परेशान मत होइए। यह कोई साधारण महाकाव्य नहीं, बल्कि एक ‘कॉस्मिक कोड’ है। लंका के युद्धक्षेत्र में उस दिन भौतिक विज्ञान के नियम टूट रहे थे। मेघनाद और लक्ष्मण का युद्ध वास्तव में ‘एंट्रोपी’ (Entropy – अव्यवस्था) और ‘ऑर्डर’ (Order – व्यवस्था) के बीच का महासंग्राम था। हम जब इसे विस्तार से समझते जाएंगे तो एक-एक कड़ी आपस में जुड़ती जाएगी और इस युद्ध को आप सिर्फ महाकाव्य की तरह नहीं बल्कि विज्ञान की तरह अनुभव कर पाएंगे। आगे बढ़ते हैं….।
गोस्वामी जी आगे लिखते हैं कि – मगतनय लखनहिं उठावन लागा। मतिभ्रम भयो उठइ नहिं भागा॥
मेघनाद आगे बढ़ा। उसने अपनी भुजाओं की पूरी शक्ति बटोरी ताकि वह लक्ष्मण के शरीर को उठाकर रावण के राजदरबार में ले जा सके। उसे लगा कि वह एक मूर्छित राजकुमार को उठा रहा है, लेकिन जैसे ही उसने स्पर्श किया…
क्या मेघनाद उस शरीर को हिला पाएगा जिसका आधार स्वयं ‘शेषनाग’ (The Infinite Support) है?
क्या होगा जब ‘गुरुत्वाकर्षण’ (Gravity) अचानक शून्य के बजाय ‘अनंत’ (Infinity) हो जाए?
हाहाकार के उस क्षण में हनुमान जी किस ‘वार्प स्पीड’ (Warp Speed – प्रकाश से तेज गति) से काल को चुनौती देने निकलेंगे?
तब क्या लंका का महान योद्धा ब्रह्मांड के भार के सामने घुटने टेक देगा…..?

